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एफडीआई पर होगी आरपार की लड़ाई: शरद यादव
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:18 AM IST
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रिटेल में एफडीआई के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ अब आरपार की लड़ाई होगी। यह कहना है जद-यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव का। उन्होंने कहा है कि आम आदमी के लिए शुरू हुई इस लड़ाई में अब या तो पूरी तरह से जीत होगी या फिर हार।
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उन्होंने व्यापारियों से कहा कि वे संसद के आसपास धरना-प्रदर्शन और बैठक न कर सीधे लाल किला से लड़ाई लड़ने की तैयारी करें। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली और माकंपा के सीताराम येचुरी ने भी एफडीआई का विरोध करते हुए इसे जन विरोधी करार दिया है। येचुरी ने कहा कि यह मुद्दा राष्ट्रहित से जुड़ा है इसलिए विपक्षी पार्टियां एक साथ हैं।
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रिटेल में एफडीआई पर कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की ओर से आयोजित राष्ट्रीय परिचर्चा में भाग लेते हुए जद-यू अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में न सिर्फ सरकार ने वादाखिलाफी की है, बल्कि लोकतंत्र का अपमान भी किया है। संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में तत्कालीन वित्त मंत्री और सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने सभी सदस्यों को यह आश्वासन दिया था कि एफडीआई को आम सहमति के बाद ही लागू किया जाएगा। वहीं, राज्यसभा में भी उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने भी इसी तरह का आश्वासन दिया था। यह आश्वासन मौखिक नहीं था, बल्कि दोनो सदनों के रिकार्ड में हैं। इसके बावजूद सरकार ने सदन को विश्वास में लिए बगैर ही रिटेल में एफडीआई लागू कर दिया।
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भाजपा नेता अरुण जेटली ने एफडीआई पर सरकार के निर्णय को पत्थर की लकीर बताने वाले वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब देश के संविधान और कानून में संशोधन हो सकता है तो एफडीआई का फैसला वापस क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने एफडीआई लागू करने वाले अन्य देशों का हवाला देते हुए कहा कि यह मॉडल जब उनके अपने देश में फेल हो गया तो फिर भारत में किस प्रकार फलेगा सरकार अभी तक इसे स्पष्ट नहीं कर पाई है। इस मुद्दे पर विपक्ष की नियम 184 के तहत चर्चा कराने की मांग से भी सरकार पीछे हट रही है।