गुजरात से आई शेरनी की मौत पर हड़कंप, प्रमुख वन संरक्षक नपे
मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट लायन सफारी में शनिवार तड़के शेरनी तपस्या की मौत हो गई। यह 11 दिन पहले गुजरात के जूनागढ़ से आई थी। डाक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम के बाद बिसरा सुरक्षित कर लिया है। सफारी के अंदर यह 8वीं मौत है। इससे पहले एक जोड़ा शेर और 5 शावकों की मौत हो चुकी है।
वहीं इस मौत को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) एसके उपाध्याय को हटाने के आदेश दे दिए हैं। उन्हें वन अभ्यारण्यों और पक्षी विहारों के रखरखाव में लापरवाही बरतने का दोषी माना गया है।
साथ ही जांच के लिए कमेटी गठित की है। शेरनी तपस्या को जेसिका शेरनी और पटौदी शेर के साथ 28 दिसंबर 2015 को गुजरात के जूनागढ़ जू से लाया गया था।
दो दिन पहले आया था बुखार
साढ़े तीन साल उम्र की शेरनी तपस्या को दो दिन पहले बुखार आ गया। हालत
बिगड़ने पर उसे बाड़ा से सफारी हास्पिटल में शिफ्ट किया गया। अचानक बुखार
आने पर सफारी प्रशासन ने बरेली आईबीआरआई, मथुरा और कानपुर के डाक्टर्स को
बुलाया। डाक्टरों ने ड्रिप आदि लगाकर उसे ठीक करने का प्रयास किया लेकिन
कोई सुधार नहीं हुआ।
शनिवार तड़के करीब चार बजे उसने दम तोड़ दिया। सुबह
लायन सफारी के अंदर ही पोस्टमार्टम कर शव को जला दिया गया। उसका बिसरा
सुरक्षित रखा गया है।
लायन सफारी पार्क निदेशक संजय श्रीवास्तव ने बताया कि
शेरनी तपस्या की मौत श्वसन तंत्र फेल होने से हुई है। इस मामले में
सेवानिवृत आईएएस वीएन गर्ग की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन
किया गया है।
बाहर से बुलाया गया था डॉक्टर
उधर, सैफई में मौजूद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले की
जानकारी मिलते ही प्रमुख वन संरक्षक एसके उपाध्याय को पद से हटा दिया है।
डीएफओ चंबल, इटावा अनिलक पटेल का कहना है कि शेरनी तपस्या गुरुवार को बीमार
हुई थी। बाहर से डाक्टर बुलाया गया था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
गौरतलब
है कि लायन सफारी में एक के बाद एक 8 शेर व शावकों की मौत हो चुकी है।
सबसे पहले विष्णु व लक्ष्मी नाम के बब्बर शेरों का जोड़ा कुत्तों वाली
कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी से मौत हुई थी। इसके बाद हीर व मनन जोड़ा से हुए
दो शावक और गीगो व ग्रीष्मा से हुए तीन शावकों को भी सफारी प्रशासन बचाने
में नाकाम रहा।
इसी बीच कुंवारी नाम की शेरनी करीब 8 महीने गंभीर रूप से
बीमार रही। हालांकि इलाज के बाद उसके दुरुस्त होने का दावा किया गया है। अब
तपस्या शेरनी की मौत से मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर कई सवाल उठ रहे
हैं।