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तनाव का गलत फायदा उठाती है पाकिस्तान की सेना

Sun, 03 Jan 2016 05:35 AM IST
Updated Sun, 03 Jan 2016 05:35 AM IST
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dailouge between india and pakistan

पिछले साल दिसंबर में बैंकॉक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की बातचीत, सुषमा का पाक दौरा और फिर अफगानिस्तान से लौटते समय मोदी की अचानक पाकिस्तान यात्रा से दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की उम्मीद जगी।

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हालांकि, दोनों देशों खास तौर से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सामने इस शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में घरेलू बाधाएं आड़े आ रही हैं। पाकिस्तान की सेना ने शरीफ की ताकतों पर नियंत्रण कर रखा है।
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विश्व में सबसे तेजी से बढ़ते पाकिस्तान के परमाणु आयुध प्रोग्राम का नियंत्रण भी सेना के हाथों में है। दूसरी तरफ, भारत के साथ तनावों का नाजायज फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी सेना वहां अपनी महत्ता साबित करती है।
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अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि शरीफ-मोदी के नजदीक आने को वहां के सेना के जनरल किस नजरिये से देखते हैं। यद्यपि, यह स्पष्ट है कि परमाणु ताकतों से लैस दोनों देशों के बीच अफगानिस्तान और कश्मीर मसले सहित कई मुद्दों पर टकराव है।

शांति वार्ता के लिए अफगान-तालिबान बातचीत का आगे बढ़ना जरूरी

dailouge between india and pakistan

अफगानिस्तान की सरकार और तालिबान के बीच शांति वार्ता को प्रोत्साहित करना मोदी-शरीफ के संबंधों की प्रमुख परीक्षा होगी।

पाकिस्तान अफगान तालिबान को जहां सहायता उपलब्ध कराया है वहीं भारत अफगान सरकार को सैन्य सहायता के जरिये अपना समर्थन देती आई है।

इस मामले में पाकिस्तान की सेना लंबे समय से दोहरा खेल खेलती आई है। अमेरिकी सहायता लेकर वह अफगानिस्तान में तालिबान को समर्थन देने के साथ-साथ भारत विरोधी आतंकियों की मदद भी करती आई है।

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