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गंगा के मुद्दे पर मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट की लताड़

Thu, 15 Jan 2015 09:04 AM IST
Updated Thu, 15 Jan 2015 09:04 AM IST
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clean campaign of ganga is only issue for government to till next election

गंगा वर्ष 2018 तक साफ हो जाएगी। केंद्र सरकार का यह जवाब सुप्रीम कोर्ट को इस कदर नागवार गुजरा कि उसने सरकार से पूछा कि क्या गंगा की सफाई 2019 तक हो जाएगी या फिर अगले कार्यकाल के लिए भी गंगा सफाई उसका मुद्दा बना रहेगा।

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शीर्ष अदालत ने कहा कि पिछले 30 सालों से गंगा की सफाई का काम चल रहा है और इस पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन यह अब भी मैली है। शीर्ष अदालत ने एक बार फिर दोहराया कि गंगा की सफाई चरणबद्ध तरीके से हो।
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केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने न्यायमूर्ति टी. एस. ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने बुधवार को कहा कि गत मई महीने में नई सरकार आई है और सरकार इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 तक गंगा की सफाई हो जाएगी। मालूम हो कि 1985 से गंगा की सफाई से संबंधित जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
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अब तक 2000 करोड़ रुपये खर्च

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पीठ ने कहा कि सरकार को नदी में प्रदूषण को लेकर चिंता करने की जरूरत है क्योंकि वर्तमान सरकार ने चुनाव के दौरान इस मुद्दे पर अपनी गंभीरता और प्रतिबद्धता जताई है।

गंगा की सफाई पर अब तक 2000 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन यह अब भी मैली है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार के पास अगर धन की कमी नहीं है तो काम को जल्द से जल्द प्रभावी तरीके से अंजाम देना चाहिए।

पीठ ने सरकार से कहा, आप इसका खाका लेकर आइए कि कितने किलोमीटर की सफाई कितने समय में होगी। अगर कोई समस्या उत्पन्न होती हो तो हम उसका समाधान निकालेंगे।

इससे पहले सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार के पास धन की कमी नहीं है। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि सत्ता में आने केबाद से ही सरकार ने इस पर काम करना शुरू कर दिया। इसके लिए अलग से मंत्रालय बनाया गया।

काम को गंभीरता से लेने के लिए कहा

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उन्होंने यह भी बताया कि 118 और शहरों की पहचान की गई है। इन शहरों के निगमों से इस काम को गंभीरता से लेने के लिए कहा जा रहा है। सॉलिसिटर जनरल ने सरकार द्वारा किए गए कामों को गिनाना शुरू किया। इस पर पीठ ने कहा कि यह सब नौकरशाही वाली बात है। हम इस जंजाल में नहीं जाना चाहते। अदालत ने कहा कि हमें आप वह काम करके दिखाइए जिसकी जांच की जा सके।

पीठ ने 70 सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी)  के बारे में भी सरकार से पूछा। सरकार ने बताया 31 एसटीपी प्लांट पर काम चल रहा है। 15 प्लांट निविदा के चरण में है। जबकि अन्य प्लांट का काम पूरा हो चुका है। इनमें उत्तराखंड में 16 और उत्तर प्रदेश में 7 प्लांट पर काम हो रहा है। अदालत ने निविदा की प्रक्रिया से गुजर रहे15 प्लांट केबारे में केंद्र को जवाब देने केलिए कहा है।

सरकार ने कहा कि इस काम के सही तरीकेसे अंजाम देने केलिए आईआईटी से मांगी गई रिपोर्ट का इंतजार है। इसके जल्द ही आने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट में पर्यावरण की दृष्टि से घोषित किए गए संवेदनशील 100 किलोमीटर का भी जिक्र होगा।

गंगा नदी और प्रदूषण

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पिछले तीन दशक के दौरान सफाई पर कई हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद गंगा मैली है। देश के 26 फीसदी भूभाग में फैली यह नदी 43 फीसदी लोगों की जीवनदायिनी शक्ति बन सकती है लेकिन इसे साफ करने का अभियान पेचीदा मामला बन कर रह गया है। गंगा नदी और इसमें प्रदूषण की समस्या पर एक नजर।

गंगा नदी 2,525 किलोमीटर लंबी गंगा के तटों पर 29 बड़े शहर, 23 मध्यम दर्जे के शहर बसे हैं। गंगा पर बने डैम से 17 पावर प्लांट से वर्तमान में बिजली का उत्पादन हो रहा है। 90 फीसदी गंगा का जल सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 2008 में गंगा राष्ट्रीय नदी बनी जबकि इलाहाबाद-हल्दिया जलमार्ग को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया। गंगा को स्वच्छ बनाने को लेकर हरिद्वार, इलाहाबाद, वाराणसी समेत तमाम जगहों पर आंदोलन किए जा रहे हैं।

प्रदूषित गंगा
गंगा में प्रतिदिन 2 करोड़ 90 लाख लीटर प्रदूषित कचरा प्रतिदिन गिर रहा है। गंगा घाटी में कुल 760 ऐसी औद्योगिक इकाइयां हैं जो गंगा में बहुत ज्यादा प्रदूषण फैला रही हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की 12 प्रतिशत बीमारियों की वजह प्रदूषित गंगा का पानी है। 40 हजार शवों का प्रत्येक वर्ष गंगा के किनारे अंतिम संस्कार किया जाता है।

गंगा एक्शन प्लान

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1985 में 1,020 करोड़ रुपये की लागत से गंगा एक्शन प्लान शुरू हुआ था। पहले चरण में 865 तथा दूसरे में 780 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट की सुविधा हासिल हो पाई, जो सिर्फ 35 फीसदी है। गंगा कार्ययोजना के लिए आवंटित 1020 करोड़ रुपये में से 816.47 करोड़ खर्च होने पर भी गंगा की हालत में सुधार नहीं आया। वर्ष 1993 में गंगा एक्शन प्लान फेस-2 की शुरुआत हुई।

मिशन-2020

केंद्र की यूपीए सरकार ने अक्तूबर, 2010 में सुप्रीम कोर्ट में दिए एक हलफनामे में कहा था कि गंगा को निर्मल तथा स्वच्छ रखने के  लिए मिशन-2020 का निर्धारण किया गया है। इसके तहत पहले चरण में गंगा में गिरने वाले नालों को बंद किया जाएगा। पहले चरण में 4,000 करोड़ रुपये से निर्मलीकरण का काम होगा।

मंत्री समूह का गठन
: मई 2012 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने और उसके प्रवाह में निरंतरता रखने के लिये सात आईआईटी द्वारा तैयार की जा रही एक वृहत प्रबंधन योजना को जल्द पूरा कराने के वास्ते मंत्री समूह का गठन किया।

मोदी सरकार की पहल
10 जुलाई, 2014
: केंद्रीय बजट 2014-15 में केंद्र सरकार ने गंगा नदी को स्वच्छ व निर्मल बनाने के लिए नमामि गंगे मिशन के तहत 2,037 करोड़ रुपये का प्रावधान किया।

24 अगस्त, 2014: गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती और पर्यावरण वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक कर फैसला लिया कि गंगा के संरक्षण के लिए इसमें औद्योगिक कचरा प्रवाहित करने से रोका जाएगा। साथ ही ई-प्रवाह को कम किया जाएगा।

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