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डॉ. सचान की मौत को आत्महत्या बताने पर घेरे में CBI

Sat, 29 Sep 2012 11:14 PM IST
लखनऊ/विष्णु मोहन/ब्यूरो
लखनऊ/विष्णु मोहन/ब्यूरो Updated Sat, 29 Sep 2012 11:14 PM IST
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 cbi in question by said suicide to death of dr sachan
डिप्टी सीएमओ डॉ. सचान हत्या मामले में सीबीआई के क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के बाद मामला ठंडा होने के बजाय तूल पकड़ता दिख रहा है। डॉ. सचान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ है कि उनके दिल के चारों चैंबर खाली थे, उनमें खून नहीं था। ऐसा तभी हो सकता है जब एक्सेस ब्लीडिंग हुई हो। ऐसे में सीबीआई का यह दावा कि डॉ. सचान कोई मेजर वेन या आर्टरी नहीं काट पाए, कितना सच्चा है? सीबीआई की थ्योरी पर यह सवाल डॉ. सचान के भाई डॉ. आरके सचान ने उठाया है। आरके सचान खुद भी फोरेंसिक एक्सपर्ट हैं।
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वह कहते हैं सीबीआई रिपोर्ट एक पक्षीय है। इसे देखने से ही साफ है कि सीबीआई ने जांच से पहले ही वह मान लिया जो कुछ बड़े आईएएस-आईपीएस या उनके आका कह रहे थे। सीबीआई कैसे कह सकती है कि डॉ. सचान के शरीर पर जो कट के निशान थे, वह उन्होंने ही बनाए? एक हाथ पर गहरा कट लगने के बाद कोई व्यक्ति दूसरे हाथ पर इतना गहरा कट कैसे लगा सकता है। सीबीआई कह रही है कि मौत ‘ड्यू टू एस्फिक्सिया’ (गला दबने से दम घुट जाने के कारण) हुई, जबकि हार्ट में खून था ही नहीं। ऐसे में सीबीआई पर कैसे भरोसा किया जाए। हम कोर्ट से एसआईटी का गठन करवा कर दोबारा जांच की मांग करेंगे।
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डॉ. सचान की पत्नी डॉ. मालती सचान भी सीबीआई पर एकतरफा रिपोर्ट दाखिल करने का आरोप लगाती हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई की थ्योरी के मुताबिक, डॉ. सचान ने आर्थिक लाभ के लिए दोनों सीएमओ की हत्या करवा दी और हत्यारों को लाखों रुपये दिए। उन्होंने कहा कि मुझे तो नहीं मालूम कि हमारे पास इतने रुपये थे। मकान बनवाने के लिए डॉ. सचान ने जो लोन लिया था, आज भी उसकी किस्तें चुकाई जा रही हैं। बेटे को बाहर भेजने के लिए गहने बेचने पड़े। अगर एकतरफा जांच कर कुछ बड़ों के हित में रिपोर्ट दी जानी थी तो इतने महीने लगाने की क्या जरूरत थी। राजनीतिक साजिश में डॉ. सचान की बलि दे दी गई। मालती ने कहा कि अदालत ने 16 अक्तूबर की तिथि लगाई है। देखना है कि अदालत का क्या रुख रहता है। उसके बाद ही आगे की लड़ाई का फैसला होगा।
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कई अहम गवाहों के बयान ही दर्ज नहीं किए
डॉ. सचान प्रकरण में मुख्य याचिकाकर्ता सच्चिदानंद सच्चे कहते हैं कि मनमानी और आधारहीन जांच के जरिए सीबीआई क्या हासिल करना चाहती है, यह तो वही जाने, लेकिन असलियत यह है कि सीबीआई ने जानबूझ कर ऐसी रिपोर्ट लगाई है। सच्चे के मुताबिक सीबीआई ने अपनी जांच में जेल के कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान ही दर्ज नहीं किए। सच्चे की मानें तो सीबीआई की मंशा शुरुआत से ही कुछ और थी, इसी वजह से मामले की जांच लखनऊ के क्षेत्रीय निदेशक जावेद अहमद से हटा कर दिल्ली कार्यालय स्थानांतरित कर दी गई। इसी से साफ है कि बड़ों को बचाने के लिए सीबीआई ने सारे पैंतरे चले।

जवाब मांगते सवाल
1. सीबीआई का कहना है कि डॉ. सचान 22 जून को आत्महत्या करने के पहले तनाव में थे। 20 जून को सीजेएम के यहां जब डॉ. सचान से उनकी पत्नी डॉ. मालती मिली थीं तो वहां उन्होंने उनसे किसी भी तरह के तनाव के बारे में कोई बात नहीं की थी और वे बिलकुल सामान्य दिख रहे थे। डॉ. मालती सचान कहती हैं कि मेरे पति एनआरएचएम में शामिल दोषियों के  नाम का खुलासा करने का मन बना चुके थे। यह सुनियोजित हत्या है न कि आत्महत्या।

2. कुछ मेडिकल एक्सपर्ट एम्स के मेडिकल बोर्ड के उस तथ्य से विरोध रखते हैं जिसमें यह कहा गया है कि आठ घाव करने के बाद उन्होंने बेल्ट के सहारे आत्महत्या करने का निश्चय किया। सर्जन डा. वाईके सिंह कहते हैं कि डॉ. सचान एक डॉक्टर थे और मानव शरीर की संरचना को अच्छी तरह जानते थे। सामान्य तौर पर लोग आत्महत्या के लिए धारदार वस्तु से नसें काट लेते हैं। फिर उन्होंने जान देने के लिए आठ घाव लगाने जैसा पीड़ादायक कदम क्यों उठाया?

3. 22 जून को डॉ. सचान की मौत हुई थी, उस दिन आईजी जेल वीके गुप्ता ने मीडिया से कहा कि डॉ. सचान मृत पाए गए हैं, उसी समय सीबीआई अधिकारियों ने कहा कि उन्हें डॉ. सचान द्वारा लिखे सुसाइड नोट की एक फोटोकॉपी मिली है। सीबीआई ने आईजी के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की है। यह हैरान करने वाला है कि शीर्ष पर बैठे उन आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई कि जिन्हें गुप्ता ने सुसाइड नोट दिया था।

4. 22 जून को डॉ. सचान जेल अस्पताल केवार्ड में नहीं पाए गए। जेल केस्टाफ को पता था कि  वे लाखों-करोड़ों रुपये के एनआरएचएम घोटाले के हाई प्रोफाइल आरोपी हैं। जब विचाराधीन कैदियों की गिनती की गई तो कर्मचारियों ने सचान की जगह सलीम लिखा। डॉ. सचान के भाई आरकेसचान कहते हैं कि जेल का स्टाफ भी मेरे भाई की हत्या में शामिल है, लेकिन सीबीआई ने इस मौत में उनकी भूमिका की जांच नहीं की।


5. कोतवाल गोमतीनगर ने डॉ. सचान को जिला जेल में 15 और 21 जून को धमकाया था और कहा था कि यदि उन्होंने अपराध कुबूल नहीं किया तो पुलिस उनकी पत्नी और बेटी को पकड़ लाएगी और पूछताछ करेगी। जेल से यह सूचना सीजेएम तक पहुंची तो सीजेएम ने एसएचओ को जेल भेज दिया। डॉ. सचान के परिजनों का आरोप है कि सीबीआई ने डॉ. सचान की मौत में एसएचओ की भूमिका पर गौर नहीं किया।
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