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ये रहे महाराष्ट्र चुनाव परिणाम के पांच जरूरी सबक

Mon, 20 Oct 2014 03:06 PM IST
Updated Mon, 20 Oct 2014 03:06 PM IST
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Maharashtra Assembly Election Results 2014 Takeaways

मोदी लहर के दम पर जहां हरियाणा में बीजेपी ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है लेकिन महाराष्ट्र में मोदी का वो जादू नहीं दिखा जिसका कि दावा किया जा रहा था। सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद उसे सरकार बनाने के लिए किसी न किसी बैसाखी की जरूरत होगी। महाराष्ट्र के चुनाव परिणामों में कई सबक छिपे हुए हैं जिन्हें जानने की कोशिश करते हैं इस खास रिपोर्ट में।

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चुनाव नतीजों के बाद यहां जो पहली तस्वीर उभरी है उसमें साफ दिखाई दे रहा है कि महाराष्ट्र में भाजपा मोदी के जिस करिश्मे की उम्मीद कर रही थी वैसा कुछ भी दिखाई नहीं दिया।
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चुनाव नतीजों से पहले जिस तरह से ये कयास लगाए जा रहे थे, एग्जिट पोल में भी जो बातें सामने आ रही थी उसमें ये तस्वीर दिख रही थी की बीजेपी कम से कम 130 से लेकर 152 सीटों तक जा सकती है। यानी भाजपा को बहुमत के लगभग करीब बताया जा रहा था और ये माना जा रहा था कि उसे किसी बड़े दल से गठबंधन की संभावना के लिए हाथ-पैर नहीं मारने पड़ेंगे।
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लेकिन 19 अक्टूबर को जैसे ही चुनाव नतीजे सामने आने शुरू हुए भाजपा के दावों की हवा निकलनी भी शुरू हो गई। जिस शिवसेना से पार्टी ने 25 साल से चला आ रहा अपना गठबंधन तोड़ा। उसने राज्य में भाजपा को कड़ी टक्कर दी। शायद इसी का खामियाजा है कि भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा और पार्टी 122 सीटों पर सिमट गई। वहीं पार्टी के वोट शेयर पर गौर करें तो उन्हें करीब 28 फीसदी वोट मिले हैं।

ये हाल तब है जब प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य में भाजपा के प्रचार में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। राज्य में मोदी ने करीब 25 रैलियां की इसके बाद भी मोदी का जादू जनता के सिर चढ़कर बोलता दिखाई नहीं दिया। लोकसभा चुनाव में उठी 'मोदी लहर' यहां चुनाव में फेल होती दिखाई दी।

बाल ठाकरे के बाद भी शिवसेना का वजूद

Maharashtra Assembly Election Results 2014 Takeaways

महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे जितने मोदी और भाजपा के लिए अहम थे। उतने ही इन नतीजों से शिवसेना का भी वजूद जुड़ा हुआ था। करीब 15 साल के कांग्रेस-एनसीपी शासन के बाद शिवसेना को इस बार के चुनाव में करिश्मे की उम्मीद थी।

शिवसेना को लग रहा था कि इन चुनावों में पार्टी कुछ बड़ा करेगी। लेकिन बाल ठाकरे के निधन से पार्टी को बड़ी हानि की आशंकाएं सियासी पंडित लगा रहे थे।

इन सबके बीच भाजपा से शिवसेना का गठबंधन टूटने के बाद ये सवाल उठने लगे कि आखिर शिवसेना इन चुनावों में क्या करेगी ये भी चर्चा का मुद्दा बन गया।

हर कोई यही कयास लगा रहा था कि बाला साहब ठाकरे और भाजपा दोनों के बगैर कहीं शिवसेना बिखर तो नहीं जाएगी। लेकिन चुनाव के नतीजों ने साबित कर दिया की उद्धव ठाकरे भले ही पार्टी को उम्मीद मुताबिक सफलता दिलाने में सफल नहीं रहे हों। फिर भी उन्होंने पार्टी के वजूद को बनाए रखने में सफलता हासिल की है।

कम से कम मराठी मानुष के नाम पर अपनी सियासत को अंजाम तक ले जाने में जुटी शिवसेना इन चुनावों में 63 सीटें जीतीं हैं। पार्टी दूसरे नंबर पर पहुंच गई है। शिवसेना के वोट शेयर पर गौर करें तो उसे प्रदेश में करीब 20 फीसदी वोट मिले हैं।

हाथ से छिटकी घड़ी का खामियाजा

Maharashtra Assembly Election Results 2014 Takeaways

इस चुनाव में सबसे बड़ा खामियाजा अगर किसी को उठाना पड़ा है तो वो कांग्रेस और एनसीपी है। जिन्हें जनता ने तीसरे और चौथे नंबर की पार्टी बना दिया है।

पिछले 15 साल से राज्य में सत्ता चलाने वाली दोनों पार्टियों के खिलाफ जनता का गुस्सा ऐसा फूटा की कांग्रेस को 42 सीटें और एनसीपी को 41 सीटें मिली हैं।

अगर उनके वोट शेयर की बात करें तो उसमें काफी गिरावट आई है। कांग्रेस का वोट शेयर 18 फीसदी और एनसीपी को करीब 17 फीसदी वोट मिले हैं।

कांग्रेस और एनसीपी के इस हाल के लिए कहीं न कहीं उनकी चुनावी रणनीति ही जिम्मेदार नजर आई। चुनाव से पहले उनकी गठबंधन सरकार भ्रष्टाचार को लेकर उंगलियां उठी। इन सबके बीच उनके गठबंधन में दरार पड़नी शुरू हो गई। जो चुनाव करीब आते-आते टूट ही गई।

दोनों गठबंधन दलों का अलग-अलग चुनाव लड़ना ये चुनावी समझ पर सवाल खड़े करता है। जो गठबंधन इतने दिनों से राज्य की सत्ता पर काबिज था वो अचानक ऐसे में माहौल में टूट गया जबकि उसे हाल के लोकसभा चुनाव में अपने विरोधियों से करारी हार का सामना करना पड़ा था।

ऐसे माहौल में जब कुछ भी उनके पक्ष में नहीं था, अगर दोनों पार्टियां एक साथ मिलकर लड़ती तो उन्हें ज्यादा फायदा मिल सकता था। कम से कम दोनों दल तीसरे और चौथे नंबर पर तो नहीं पहुंचते।

राज की राजनीति खारिज

Maharashtra Assembly Election Results 2014 Takeaways

महाराष्ट्र के नतीजों का सबसे बड़ा असर राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पर पड़ा। जनता ने राज ठाकरे पर खास भरोसा नहीं जताया।

राज ठाकरे के राजनीति के तरीके को जनता ने लगभग खारिज ही कर दिया। शायद इसीलिए पार्टी को महज एक सीट ही आई है। मनसे का वोट शेयर भी इन चुनावों में महज 3 फीसदी के आस-पास सिमटता दिखाई दिया।

राज ठाकरे अपने खास अंदाज के लिए जाने जाते हैं। उनकी बुलंद तेवर और मराठी जनता को लेकर उनकी खास रणनीति के चलते ही महाराष्ट्र में उनसे किसी चमत्कार की उम्मीद थी। लेकिन ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया।

जनता ने अपने फैसले में जिस तरह से उनकी सियासी रणनीति को खारिज किया। इससे साफ है कि राज ठाकरे सबक लेंगे। संभव है कि आने वाले वक्त में राज ठाकरे का मिजाज कुछ अलग नजर आए।

हार से पहले कांग्रेस की हताशा

Maharashtra Assembly Election Results 2014 Takeaways

महाराष्ट्र में सामने आए चुनाव नतीजों में जिस तरह से भाजपा सबसे बड़ा दल बन कर उभरा उसमें कहीं न कहीं कांग्रेस का रोल ही सबसे अहम रहा।

लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद से ही कांग्रेस में सब-कुछ अच्छा नहीं चल रहा। चाहे पार्टी के अंदर की बात हो या फिर उनके अपने सहयोगियों से ताल-मेल का मामला। लगभग सभी जगह पर कांग्रेस आलाकमान की रणनीति फेल होती दिखाई दी।

इसकी शुरूआत कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन टूटने के बाद ही हो गया। दूसरे महाराष्ट्र में चुनाव को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने कोई खास रणनीति नहीं बनाई।

जहां मोदी ने प्रदेश में 25 रैलियां की उसके मुकाबले सोनिया और राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार में ज्यादा सक्रियता नहीं दिखायी। उनके मिजाज से ये लगने लगा था कि पार्टी अब तक लोकसभा चुनाव में मिली हार को पचा नहीं सकी है। कांग्रेस में हताशा ने ही भाजपा को और मजबूत बना दिया है।

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