प्याज, दाल के बाद अब महंगी चीनी ने उड़ाई सरकार की नींद
दाल व प्याज के बाद अब चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गयी है। पिछले चार-पांच महीनों के दौरान चीनी की थोक कीमत 20-22 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 29-30 रुपये प्रति किलोग्राम हो चुकी है।
कृषि उपज विपणन समिति के मुताबिक इस साल अगस्त महीने में चीनी के थोक दाम 26 रुपये प्रति किलोग्राम थे जो अक्तूबर के पहले सप्ताह में 29 रुपये प्रति किलोग्राम के आस-पास हैं। इस साल कम बारिश की वजह से गन्ने के उत्पादन में कमी की आशंका है।
वैश्विक बाजार में भी चीनी के दाम में तेजी का रुख है। इस कारण देश से काफी अधिक मात्रा में चीनी का निर्यात हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया की विश्लेषक एजेंसी ग्रीन पुल के मुताबिक वर्ष 2015-16 के दौरान वैश्विक मांग के मुकाबले चीनी की आपूर्ति में 45-56 लाख टन की कमी रहेगी।
इस साल चीन और भारत दोनों में ही चीनी का उत्पादन कम होगा। शुक्रवार को भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के थोक बाजार में चीनी के मूल्य में प्रति क्विंटल 30 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस साल जुलाई से लेकर अब तक चीनी की वैश्विक कीमत में भी 30 फीसदी का इजाफा हो चुका है।
प्याज 60 तो दाल 175 रुपए किलो पहुंची
चीनी उद्योग के मुताबिक देश में फिलहाल 40 लाख टन अतिरिक्त चीनी है, लेकिन इनमें से अधिकतर चीनी के निर्यात की पूरी संभावना है। कमजोर मॉनसून की वजह से महाराष्ट्र व कर्नाटक में गन्ने के उत्पादन में गिरावट होगी।
इंडियन शुगर मिलर्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक इस साल चीनी के उत्पादन में 6 फीसदी की कमी की आशंका है। इस्मा ने वर्ष 2015-16 के लिए 270 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है जबकि वर्ष 2014-15 में यह उत्पादन 288 लाख टन का था। वैश्विक स्तर पर चीनी की मांग व आपूर्ति में अंतर को देखते हुए चीनी के वायदा भाव में भी तेजी का रुख है।
चीनी के थोक कारोबारियों के मुताबिक पिछले दो-तीन सालों से चीनी सुस्त पड़ी थी, लेकिन इस साल चीनी एक स्तरीय तेजी तक जा सकती है। प्याज व दाल की कीमत पहले ही काफी तेज है।
सरकार की तरफ से प्याज व दाल के निर्यात के बावजूद इनके खुदरा भाव में कोई कमी नहीं आई है। प्याज अब भी 60 रुपये प्रति किलोग्राम तो दाल 175 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है।
दाल के बढ़े दाम ने उड़ाई सरकार की नींद
दाल के बढ़ते दाम से केंद्र सरकार की चिंता बढ़ी हुई है। महंगाई का दर्द बिहार चुनाव में राजग की मुश्किलें न बढ़ा दें। इससे बचने के लिए आवश्यक वस्तुओं के मूल्य पर केंद्र की पल-पल नजर है।
कैबिनेट सचिव प्रदीप कुमार सिन्हा ने शीर्ष अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक कर आवश्यक वस्तुओं खासतौर से दाल और प्याज के दामों की समीक्षा की है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और उसके दामों पर नजदीक से गहरी नजर रखें।
बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सिन्हा ने केंद्र सरकार के मंत्रालयों से कहा है कि वे राज्यों के साथ बेहत्तर समन्वय बनाएं। इस बैठक में कृषि और खाद्य एवं नागरीक आपूर्ति मंत्रालय के सचिव भी शामिल हुए। सरकार का कहना है कि उसके प्रयास रंग ला रहे हैं। चीनी, खाद्य तेल, आलू, और अनाज के दाम नियंत्रण मे हैं।
उसका कहना है कि प्याज के निर्यात में वृद्धि और 2000 टन प्याज आयात के वजह से प्याज के दामों में भी गिरावट आ रही है। वहीं दाल के मामले में भी सरकार का कहना है कि उसने दाल पर शून्य आयात शुल्क की सीमा सितंबर 2016 तक बढ़ा दी है।
इसके साथ ही घरेलू बाजार में सस्ते दाम पर दाल उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने लगभग 7000 टन दाल आयात करने का निर्णय लिया है। जिसमें 3250 टन दाल भारत पहुंच चुका है। 1750 टन दाल भी बंदरगाह पर चंद दिनों में पहुंचने वाली है।
तो लंबे समय तक दाल के संकट से निजात पाने के लिए सरकार ने दाल के न्यून्तम समर्थन मूल्य में भारी इजाफा कर किसानों को दाल की पैदावार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है।