गजेंद्र के खत में छिपा है उनकी मौत का असली राज?
आप की रैली में खुदकुशी करने वाले किसान गजेन्द्र को लेकर देशभर में हंगामा मचा है। मामले के लेकर राजनीतिक दलों और पुलिस प्रशासन में आरोप प्रत्यारोपों का दौर जारी है।
इसी बीच किसान गजेन्द्र के आत्महत्या से पहले लिखे गए लैटर को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लगातार चल रहे आरोप प्रत्यारोप के बीच बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि लैटर गजेन्द्र ने लिखा भी था या नहीं।
क्योंकि लैटर में लिखी गई जिस राईटिंग को गजेन्द्र की बताया जा रहा है उसे उनके घरवालों ने उनकी मानने से इंकार कर दिया है। गजेन्द्र के भाई योगेन्द्र ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि लैटर की हैंडराइटिंग उसके भाई की नहीं है।
बेटी और भाई ने कहा नहीं है किसान की लिखावट
योगेन्द्र ने बताया कि उनकी लिखावट इस तरह की नहीं थी जिस तरह की उक्त लैटर में दिखाई जा रही है। योगेन्द्र ने इस लैटर पर सवाल उठाते हुए कहा कि आमतौर पर कभी कोई सुसाइड नोट लिखता है तो उसमें अपने मौत के कारण और जिम्मेदार लोगों का जिक्र जरूर करता है। लेकिन इस खत में ऐसा कोई जिक्र नहीं है।
वहीं मृतक किसान गजेन्द्र की बेटी मेघा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जिस लैटर को उसके पिता का बताया जा रहा है उसमें उनकी राइटिंग है ही नहीं। मेघा ने कहा कि उसके पिता इस तरह का कोई कदम उठा ही नहीं सकते थे इसलिए इस तरह का कोई खत लिखने का सवाल ही नहीं है।
वहीं उसने पिता की मौत के लिए आप नेताओं को जिम्मेदार ठहरा दिया। वहीं उसने सरकार से भी अपनी और भाई बहनों की पढ़ाई का खर्चा उठाने और सरकारी नौकरी की मांग की है।
लैटर की करवाई जा रही फोरेंसिक जांच
लैटर की राइटिंग और उसकी सत्यता को लेकर सवाल यूं नहीं उठ रहे, लैटर पर संदेह इसलिए भी हो जाता है कि लैटर के अंत में जिस तरह से कोई नाम काटकर गजेन्द्र सिंह नाम लिखा गया उससे यह संदेह भी गहरा हो जाता है कि कोई व्यक्ति पहली बार में भी अपना नाम कैसे गलत लिख सकता है।
हालांकि दिल्ली पुलिस ने उक्त लैटर की जांच के लिए उसे फोरेंसिक लैब भिजवा दिया है जहां से लैटर की असलियत जल्द सामने आने की उम्मीद की जा सकती है।
ऐसे में फिर बड़ा सवाल यही है कि अगर लैटर में लिखी राइटिंग गजेन्द्र की नहीं है तो किसकी है। और कोई उनके नाम से लैटर क्यों लिखेगा, क्या हो सकता है उसका मकसद?