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बाप-भाई के सामने मारी वकील को गोली

Thu, 12 Mar 2015 11:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Thu, 12 Mar 2015 11:02 AM IST
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advocate nabi shot in front of father and brother.

सेवा में,

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थानाध्यक्ष
कर्नलगंज, इलाहाबाद

निवेदन है कि आज दिनांक 11-3-2015 को समय एक बजे मैं अपने पुत्र नफीस अहमद के साथ जिला कचहरी गया था। वहां मैं अपने दूसरे पुत्र नबी अहमद एडवोकेट से मिलने उनके बस्ते पर गया था तो पता चला कि वो कोर्ट गए हैं। मैं अपने पुत्र से मिलने कोर्ट जा रहा था तो न्याय भवन की मुख्य सीढ़ियों के पास नबी अहमद दिखे। उनसे शैलेंद्र सिंह दरोगा जी बात कर रहे थे। अचानक शैलेंद्र सिंह दरोगा ने अपनी सर्विस पिस्टल निकाला और गाली देते हुए मेरे वकील पुत्र नबी अहमद की कॉलर पकड़ लिया तथा कहा कि बहुत बड़ा वकील बनता है। आज तेरी वकालत खत्म करता हूं और मेरे पुत्र के सीने में गोली मार दिया।

मैं मेरे दूसरे पुत्र नफीस अहमद तथा अन्य उपस्थित अधिवक्ताओं चंदन मिश्र, आरिफ सईद और सूर्य शुक्ला तथा अन्य अधिवक्ताओं ने दरोगा को रोकने का प्रयास किया तो उसने धमकाते हुए पिस्टल तान दिया और हवाई फायर करते हुए भाग गए। नबी अहमद को लादकर स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। दरोगा शैलेंद्र सिंह को मैं पहले से जानता व पहचानता हूं क्योंकि कई बार अपने पुत्र नबी अहमद के साथ उसके द्वारा लिखाए गए मुकदमे की पैरवी के लिए दरोगा के पास आता-जाता था। मेरे पुत्र नबी अहमद ने मोहम्मद राशिद सिद्दिकी जो सिंचाई विभाग में नौकरी करता है के विरुद्ध रिपोर्ट लिखाई थी जिसमें मोहम्मद राशिद ने शैलेंद्र सिंह दरोगा से मिलकर फाइनल रिपोर्ट लगवा दिया था तथा धमकी भी दिया था कि तुम्हारी हत्या करा दूंगा।

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वकील की हत्या के बाद भारी बवाल

advocate nabi shot in front of father and brother.

इलाहाबाद के जिला कचहरी परिसर में बुधवार दोपहर झड़प के दौरान दरोगा शैलेंद्र सिंह ने वकील नबी अहमद (27) की  गोली मारकर हत्या कर दी। अदालत परिसर में साथी के कत्ल से वकीलों का आक्रोश फूट पड़ा। गोली चलाकर भागे दरोगा को दबोचने के लिए वकील एसएसपी दफ्तर में घुसे तो पुलिसवालों से उनका टकराव हो गया।

पथराव के बीच फायरिंग होने लगी। एक सिपाही अजय नागर (28) के गले में गोली लग गई। इसके बाद कचहरी के अंदर और बाहर पुलिस तथा वकीलों के बीच संघर्ष छिड़ गया। आरोप है कि पुलिस ने वकीलों को अदालत परिसर में दौड़ाकर पीटा और दर्जनों गाड़ियां तोड़कर आग लगा दी।

वकील की हत्या की खबर फैली तो हाईकोर्ट के पास भी वकीलों ने जाम लगा दिया। दमकल और पुलिस की चार गाड़ियां जला दी गईं। ग्रामीण इलाकों में तहसीलों को बंद कराकर वकीलों ने चक्काजाम किया और पुलिस बूथ में घुसकर आगजनी की।

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कातिल दरोगा निलंबित, तलाश में जुटी पुलिस

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जिला अदालत परिसर में वकील नबी अहमद की गोली मारकर हत्या के आरोपी सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया। एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि फरार दरोगा की तलाश में पुलिस की कई टीम लगा दी गई। उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

शैलेंद्र सिंह 2007 बैच का सब इंस्पेक्टर है। उसे 29 जनवरी को कीडगंज थाने की जीवन ज्योति चौकी से यमुनापार की नारीबारी चौकी का प्रभारी तैनात किया गया था। वह मूल रूप से अंबेडकर नगर जनपद के राजे सुल्तानपुर गांव का रहने वाला है। एसएसपी ने बताया कि शैलेंद्र की धरपकड़ में पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम लगी है। एक टीम अंबेडकरनगर भी भेजी गई है। दरोगा शैलेंद्र की करतूत की जानकारी दोपहर बाद नारीबारी चौकी पहुंची तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी सन्न रह गए।

घबराहट का आलम यह कि ज्यादातर सिपाही चौकी से निकलकर इधर-उधर चले गए। देर शाम अमर उजाला संवाददाता ने चौकी में संपर्क किया तो वहां सिर्फ दो सिपाही नजर आए। वे भी बेहद घबराहट में दिखे और कुछ भी बोलने से कतरा गए। उधर, घटना से नाराज अधिवक्ता यह भी कहते मिले कि दरोगा भागा नहीं है बल्कि उसे पुलिस अफसरों ने ही सुरक्षित निकालकर कहीं दूसरे थाने में छिपा रखा है।

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दो माह पहले हुआ है सिपाही का ब्याह

advocate nabi shot in front of father and brother.

बुधवार दोपहर जिला अदालत में वकील को गोली मारने के बाद पुलिस-वकीलों के बीच टकराव के दौरान गोली लगने से घायल सिपाही अजय नागर का बमुश्किल दो माह पहले ही विवाह हुआ है। ब्याह के बाद कुछ दिन घर पर गुजारने के बाद वह ड्यूटी पर इलाहाबाद लौट आया था। गले में गोली धंसने से उसकी हालत नाजुक बनी है। निजी चिकित्सालय में उसकी हालत पर पुलिस अफसर भी नजर रखे हुए हैं।

मेरठ के किठौला क्षेत्र के शकरपुर गांव का रहने वाला अजय नागर 2011 बैच का सिपाही है। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर का है। उसके बड़े भाई आर्मी में हैं जबकि दूसरा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। पिता जगमाल सिंह खेती करते हैं। इसी साल जनवरी में अजय नागर की शादी हुई है। विवाह में वह 25 दिन की छुट्टी लेकर घर गया था। फरवरी के पहले हफ्ते में ही वह ड्यूटी पर इलाहाबाद लौटा। तब से घर नहीं गया है। अजय नागर की तैनाती आर्म्ड पुलिस में पुलिस लाइन में है। वहीं से उसे कर्नलगंज थाने में संबंद्ध किया गया है। बुधवार दोपहर बवाल शुरू होने पर वह भी पुलिस फोर्स के साथ कचहरी में पहुंचा। इसी दौरा फायरिंग में अचानक अजय के गले में गोली लगी और वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा। सिपाही को खून से लथपथ देख साथी पुलिसकर्मी दौड़े। उसे रामबाग स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया।

एक्सरे से पता चला है कि गले से घुसी गोली अब अजय के सीने में फंसी है। खून काफी बहने से उसकी हालत गंभीर बनी है। घायल सिपाही का हाल जानने के लिए साथी सिपाही परेशान रहे। वे एक-दूसरे को फोन कर सिपाही की तबीयत जानने के लिए परेशान रहे। रात लगभग सात बजे आईजी बीबी शर्मा, डीआईजी भगवान स्वरूप, एसएसपी दीपक कुमार, जिलाधिकारी भवनाथ सिंह घायल सिपाही को देखने अस्पताल पहुंचे। हालत में सुधार होने के बाद डॉक्टर उसका आपरेशन कर सीने में फंसी गोली निकालेंगे।।  घायल सिपाही के परिवार के लोग मेरठ से इलाहाबाद को रवाना हो गए थे। इस बीच अस्पताल में भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है।

सुरक्षा की चिंता करते तो नहीं होती वारदात

advocate nabi shot in front of father and brother.

कचहरी परिसर की सुरक्षा की यदि जरा भी चिंता की गई होती तो बुधवार को जिला न्यायालय परिसर में जो कुछ हुआ वह शायद नहीं होता। जिला अधिवक्ता संघ भी सुरक्षा की मांग को लंबे समय से उठाता रहा है। कुछ वर्षों पूर्व तीन जिला न्यायालय में हुई आतंकी हमले की घटना हो या हाल के महीनों में मुजफ्फरनगर में हुई विक्की त्यागी की हत्या की घटना हो। पंद्रह वर्ष इलाहाबाद कचहरी में भी चार लोगों की हत्या की जा चुकी है। पूर्व सांसद अतीक अहमद पर भी बम से हमला इसी कचहरी परिसर में हो चुका है।विधायक मोनू सिंह पर कचहरी परिसर में ही बम से हमला हो चुका है। जिला प्रशासन ने अगर इन घटनाओं की जरा भी परवाह की होती तो शायद आज का वाकया नहीं हुआ होता।

प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो बुधवार को जब अधिवक्ता नबी अहमद और एसआई शैलेंद्र के बीच बहस हो रही थी उस वक्त आसपास कोई दूसरा पुलिस कर्मी मौजूद नहीं था जबकि घटना स्थल से चंद कदम की दूरी पर ही पीएसी का कैंप लगा था। मुश्किल से बीस कदम की दूरी पर पुलिस की लॉकअप है जहां हर वक्त दर्जनों पुलिसकर्मी मौजूद रहते हैं मगर किसी भी हस्तक्षेप या बीच बचाव की कोशिश नहीं की। यदि पुलिसकर्मी या पीएसी ने हस्तक्षेप किया होता तो शायद गोली चलाने की नौबत नहीं आई होती।

कचहरी परिसर की सुरक्षा को लेकर जिला अधिवक्ता संघ ने कई बार प्रशासन से वार्ता भी की थी। यह मांग भी उठाई गई कि कचहरी परिसर में असलहा लेकर आने पर प्रतिबंध लगाया जाए। रसूखदार बंदियों के साथ आने वाले भारी तादाद में समर्थकों पर भी रोक लगाने की मांग की जा चुकी है। पर नतीजा सिफर रहा। वास्तविकता यह है कि कचहरी परिसर के किसी भी प्रवेश द्वारा सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। सीसीटीवी कैमरा भी नहीं लगा है। डोर मेटर डिटेक्टर जैसी कोई ऐसी डिवाइस भी नहीं है जिससे असलहा जैसी चीजों की जानकारी हो सके। इसलिए यदि ऐसे हादसे फिर होने की आशंका जताई जा रही है तो इसमें कुछ गलत भी नहीं दिखता।

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