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'लौहपुरुष' पिघले, मोदी के सुर में सुर मिलाए

Mon, 07 Oct 2013 11:15 AM IST
अमर उजाला दिल्ली
अमर उजाला दिल्ली Updated Mon, 07 Oct 2013 11:15 AM IST
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advani supports modi on compulsory voting

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने चुनाव आयोग को ईवीएम में राइट टू रिजेक्ट विकल्प का इंतजाम करने को कहा था, लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी इससे एक कदम और आगे चले गए हैं।

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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के 'अनिवार्य वोटिंग' कानून से जुड़े प्रस्ताव की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि वह निरंतर रूप से इस राजनीतिक सुधार पर फोकस कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा, "अगर कोई ऐसा राजनीतिक मुद्दा है, जिस पर मैंने वाकई ध्यान दिया है...तो वह यही चुनाव सुधार है।"

आडवाणी ने यह भी जोड़ा कि राइट टू रिजेक्ट का विकल्प तभी अर्थपूर्ण होगा, अगर वह अनिवार्य वोटिंग के साथ आए। इससे जुड़ा कानून मोदी ने गुजरात में दो बार पारित किया, लेकिन उन्हें अब तक राज्यपाल की हरी झंडी नहीं मिली है।
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उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है, "जो मतदाता बिना किसी वैध स्पष्टीकरण के भारतीय संविधान की ओर से मिले अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर रहे, वे चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के खिलाफ नेगेटिव वोटिंग करते हैं, जबकि उनकी मंशा ऐसी नहीं होती।"

आडवाणी ने कहा, "इस दिशा में पहल करने वाला भारत में इकलौता राज्य गुजरात है। यहां नरेंद्र मोदी की अगुवाई में विधानसभा ने दो बार ऐसा विधेयक पारित किया, लेकिन उन्हें राज्यपाल या दिल्ली की हरी झंडी नहीं मिली।"


दिसंबर, 2009 और मार्च, 2011 में गुजरात विधानसभा ने वोटिंग को अनिवार्य बनाने वाला विधेयक पारित किया था। संयोग से जब पहली बार इसे पास किया गया, तो मोदी वोटिंग के दौरान मौजूद नहीं थे।

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