पाक एजेंट इकबाल भट्टी को 12 साल की सजा
पाकिस्तान एजेंट शाहिद इकबाल भट्टी को बैंक में फर्जी तरीके से खाता खुलवाने के आरोप में अदालत ने 12 साल की सजा सुनाई है। इसमें उसकी मदद करने वाले नदीम को भी 10 वर्ष की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने पूर्व में जेल में बिताई अवधि को इसमें सजा में समायोजित करने का भी आदेश दिया है।
इसके अलावा शाहिद पर 15 हजार रुपये और नदीम पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इससे पहले, कोर्ट नगर पालिका से फर्जी प्रमाण पत्र और राशन कार्ड बनवाने के अलग-अलग मामलों में सजा दे चुकी है।
जासूसी के आरोप में भट्टी के पंजाब पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद उसके सहारनपुर कनेक्शन का खुलासा हुआ था। 18 अक्तूबर 2008 को बैंक के मुख्य प्रबंधक ने सदर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें बताया गया कि 17 जनवरी 2006 को भारतीय स्टेट बैंक शाखा में देवराज सहगल पुत्र स्वर्गीय हरदेव राज सहगल निवासी बी-1 हकीकत नगर बिजली घर के पास बचत खाता संख्या 01190019158 खोला गया।
पुलिस छानबीन में पाया गया कि उसका असली नाम इकबाल भट्टी है और वह पाकिस्तान के आईएसआई का एजेंट है। इस खाता को खुलवाने के लिए जौहर ट्रेडिंग कारपोरेशन के मोहम्मद इलियास जौहर की भूमिका थी। इलियास ने देवराज को 20 वर्ष से जानने का दावा किया था।
पुलिस ने उस वक्त शाहिद इकबाल भट्टी और मोहम्मद इलियास जौहर के अलावा एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसमें जांच के बाद पुलिस ने भट्टी और इलियास जौहर के बेटे नदीम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें विवेचना में इलियास ने बताया था कि उसके बेटा नदीम ही उसका खाता संचालित करता है। संभव है कि उसने ही शाहिद इकबाल की पहचान कर बैंक में हस्ताक्षर किया है।
फर्जी तरीके से बैंक में एकाउंट खोलने का आरोप हुआ सिद्ध
सबूतों और गवाहों के आधार पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौरव शर्मा ने पाक नागरिक शाहिद इकबाल भट्टी और नदीम को धारा 467 में सात-सात वर्ष, धारा 468 में दोनों को तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई।
इसके अलावा धरा 471 में शाहिद इकबाल भट्टी को दो वर्ष की सजा सुनाई। दोनों ही अभियुक्तों को प्रत्येक अपराध की सजा एक के बाद एक काटने के आदेश दिए। इकबाल भट्टी को 15 हजार रुपये अर्थदंड और अदा नहीं करने पर 45 दिन की अतिरिक्त कारावास का आदेश दिया है।
दूसरे अभियुक्त नदीम को 10 हजार का अर्थदंड और अदा नहीं करने पर 30 दिन की अतिरिक्त कारावास की सजा दी है। इसके अलावा अन्य आपराधिक मामलों में काटी जा रही सजा के साथ इस मामले की सजा काटने और पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को समायोजित करने का भी आदेश दिया।
इकबाल भट्टी को नगर पालिका में फर्जी तरीके से जन्म प्रमाण पत्र बनवाने मामले में कोर्ट ने साजिश, छल, कपट से भारत में रहने और विदेशी अधिनियम की धारा के उल्लंघन में दोषी करार दिया था।
इस मामले में उसे 14 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उसे फर्जी राशनकार्ड मामले में साढ़े तेरह साल की सजा सुनाई जा चुकी है।
शाहिद इकबाल से बन गया था देवराज
पाक नागरिक शाहिद इकबाल भट्टी ने भारत में रहने के दौरान खुद को देवराज सहगल के रूप में स्थापित करने की पूरी साजिश रच ली थी।
उसने सहारनपुर के हकीकत नगर में बाकायदा घर लेकर कंप्यूटर का काम शुरू कर दिया था। उसने बड़ी साजिश के तहत देवराज के नाम से कई कागजात हासिल कर लिए थे। हालांकि कुछ साल यहां रहने के बाद वह पंजाब चला गया था और वहीं से इसके फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था।
बेटे को बचाने का किया था प्रयास
स्टेट बैंक में शाहिद इकबाल भट्टी का देवराज सहगल के रूप में खाता खुलवाने के लिए खाता धारक इलियास जौहर ने उसकी पहचान की थी। इस मामले में खुलासा होने के बाद इलियास जौहर को आरोपी बनाया गया था।
इकबाल के वकील राकेश मोहन ने बताया कि इलियास ने बयान दिया था कि उसका खाता बेटा नदीम ही संचालित करता है और वही हस्ताक्षर भी करता है। ऐसे में कोर्ट ने नदीम को आरोपी बनाया था। हालांकि निधन से थोड़े दिन पहले इलियास ने जौहर ने बेटे को बचाने के लिए बयान दिया था. मगर, कोर्ट ने पहले बयान को ही माना।
खाकी की लापरवाही
नगर पालिका से प्रमाण पत्र मामले में सजा सुनाते वक्त न्यायालय ने सहारनपुर पुलिस पर तल्ख टिप्पणी की थी और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ दोबारा जांच के आदेश भी दिए थे।
मगर, तत्कालीन एसएसपी ने कोर्ट के आदेश के बाद भी इस मामले में लापरवाहीपूर्ण रवैया रखा और मामले की जांच नहीं कराई। कोर्ट ने साफ कहा था कि प्रमाण पत्र बनवाने में स्थानीय सभासद, अधिकारी और कर्मचारी की लापरवाही से ऐसा अपराध संभव हुआ है। उनकी भूमिका पर विवेचना होनी चाहिए। किन हालात में पाक नागरिक की मदद की।