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अभिनय भावनाओं का खेल है: नवाजउद्दीन
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Wed, 06 Mar 2013 11:43 AM IST
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'तलाश', 'कहानी' और 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' जैसी फिल्मों से पहचान बना चुके नवाजउद्दीन सिद्दीकी ने अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी के कैनेडी हॉल में फिल्मसाज-2013 के समापन कार्यक्रम में अपने दिल के राज खोलते हुए बताया कि वे भी एएमयू में एडमिशन लेना चाहते थे। इसके अलावा भी नवाज ने अमर उजाला से खास बातचीत की। आइए जानें क्या कहते हैं नवाजउद्दीन सिद्दीकी।
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क्या कारण था कि आप एएमयू में एडमिशन नहीं ले पाएं?
यह सच है मैं 18 साल पहले एएमयू में एडमिशन लेना चाहता था। मैंने बकायदा मेरठ से अलीगढ़ आकर दो साल इसके लिए प्रयास भी किया। लेकिन मार्क्स कम होने के कारण मैं एएमयू में एडमिशन नहीं ले सका।
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फिल्म इंडस्ट्री में क्या आज हीरो का स्वरूप बदल रहा है?
अब हीरो वह है जो अभिनेता है। अगर कोई बॉडी में स्ट्रांग है, मस्क्यूलर है। लेकिन एक्टिंग नहीं जानता तो कॉमेडियन लगेगा।
तो क्या एक्शन हीरो एक्टिंग से बनेगा बॉडी से नहीं?
जी हां...एक्शन अभिनय में होता है आक्रोश आंखों से झलकता है। अगर बॉडी ही एक्शन का पैमाना होती तो सभी बॉडी बिल्डर एक्शन हीरो होते।
अभिनय का मूल क्या है?
अभिनय भावनाओं खेल है। इमोशन चेहरे के मैदान पर आकर अभिव्यक्ति का खेल खेलते हैं। दर्शक इस खेल को देखकर रोमांचित होता है।