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'नमाज और कुरान पढ़ने शौक है मुझे'

Sun, 14 Sep 2014 02:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 14 Sep 2014 02:03 PM IST
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Ustad Abdul Rashid in Chandigarh, Read Interview

106 साल की उम्र। सुबह की शुरुआत पांच बजे हुक्का पीकर होती है, लेकिन आवाज में आज भी वहीं खनक है, जिसके लिए वे देश-दुनिया में जाने जाते हैं। संगीत से बढ़कर उनके लिए कुछ भी नहीं है। हां, इससे इतर अगर उन्हें कुछ करना पसंद है तो वो है, नमाज और कुरान पढ़ना। उनकी सुबह अल्लाह के नाम से शुरू होती है।

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अपनी जिंदगी के कई अनसुने किस्से शनिवार को मशहूर शास्त्रीय संगीत के महारत और तानसेन की 23वीं पीढ़ी पद्म विभूषण उस्ताद अब्दुल राशिद खान ने बताए। वे शनिवार को छठें चंडीगढ़ आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल के चौथे दिन टैगोर थियेटर-18 में प्रस्तुति देने पहुंचे। शहर में उनकी यह तीसरी लाइव परफार्मेंस थी।
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फेस्टिवल में ‘अमर उजाला’ मीडिया पार्टनर है। उनके साथ उनके पोते बिलाल भी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने संगीत की ‘रसन प्रिया’ नाम से सीडी भी लॉन्च की। सीडी का नाम उनके निक नेम पर है। वे इन दिनों आईटीसी संगीत रिसर्च अकादमी कोलकाता में संगीत की तालीम दे रहे हैं।
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मुंबई जाने के नाम पर घर में हुआ हंगामा

उस्ताद अब्दुल राशिद खान को शास्त्रीय संगीत से बेहद लगाव है। हिंदी सिनेमा के संगीत के बारे में उन्होंने हंसते हुए कि फिल्मों में संगीत नहीं लारे लप्पे होते हैं। जब उनको मुंबई जाने और हिंदी सिनेमा के लिए ऑफर आए, तो उनके घर पर खूब हंगामा हुआ। क्योंकि उनके घर पर मुंबई को बहुत दूर समझते थे।

तानसेन जब भी गाते तो होती थी बारिश
उन्होंने कहा कि तानसेन के संगीत में इतना जादू था कि उनके संगीत से प्रभु भी खुश होते थे और बारिश होती थी। उस्ताद साहब ने कहा कि वे स्टेज पर जाने से पहले सिर्फ दर्शकों को देखते हैं और एक बिना दूध वाली चाय का एक पियाला पीते हैं।

सुबह बस चाय और बिस्कुट

सौ साल से भी अधिक आयु होने पर अब भी वह एकदम फिट दिखते हैं। अपनी सेहत का राज बताते हुए उन्होंने कहा कि सुबह पांच बजे उठकर वह हुक्के के साथ एक चाय, एक बिस्कुट और एक-दो ड्रायफ्रूट्स खाते हैं। इसके बाद पूरे दिन कुछ नहीं खाते और रात को दस बजे खाना खाते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने तक उन्हें आज तक किसी तरह की कोई बीमारी नहीं हुई।

अल्लाह ने मुझे जिंदा रखा है
उस्ताद अब्दुल राशिद खान साहब ने बताया कि दो बार उन्हें साथी कलाकारों ने गुस्से में जहर तक दिया, लेकिन उन पर अल्लाह की रहम थी। कई सालों पहले उनके ही साथी कलाकार ने मरकरी पारा कोलड्रिंक में डाल कर पिला दिया था। उस समय उनकी हालत काफी गंभीर तक हो गई थी। वह अस्पताल में भर्ती थे, डॉक्टर बस उनकी नस देख रहे थे। इसी बीच उनको अल्लाह ने आकर कहा कि वे बिलकुल ठीक हैं और यह सुनकर वे उठ गए। उसके बाद से उन्होंने आज तक कभी दवा नहीं खाई।


लौट रहा है पुराना संगीत

उस्ताद साहब ने कहा कि स्पिक मैके के कार्यक्रम के जरिए युवाओं में शास्त्रीय संगीत के प्रति लगाव बढ़ रहा है। इसी वजह से पुराना संगीत लौट रहा है। उन्हें इसकी खुशी है कि युवा पीढ़ी आज शास्त्रीय संगीत की कद्रदान है।

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