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ये है कमाल, हत्यारोपी को जेल पहुंचने में लगे 26 साल

Tue, 28 May 2019 10:26 PM IST
Abhishek Singh अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़ Published by: Abhishek Singh Updated Tue, 28 May 2019 10:26 PM IST
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took 26 years to go to prison in the murde case
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

इसे कानून के साथ मजाक ही कहा जाएगा। हत्या के मुकदमे में नामजद 26 साल तक जेल ही नहीं गया और थाना पुलिस ने भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। लोग अब तक यही समझते रहे कि इसे भी अन्य आरोपियों संग बरी कर दिया गया है। 

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मगर विरोधियों को जब नामजद के अभी तक भगोड़ा होने की खबर लगी और उन्होंने अदालत से लेकर पुलिस स्तर पर पैरवी शुरू की तो अदालत ने मामले में संज्ञान लिया। अदालत ने जब आरोपी के खिलाफ वारंट जारी किए तो पुलिस भी हरकत में आई और मंगलवार को आरोपी ने कोर्ट में समर्पण कर दिया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। 
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वाकये के अनुसार टप्पल के गांव बाजौता में चर्चित होशियार सिंह-मुकेश पक्ष में रंजिश शुरू होने से पहले मुकेश पक्ष की गांव के भग्गा पक्ष से रंजिश चल रही थी। इस रंजिश में वर्ष 1993 में भग्गा पक्ष के देवेंद्र की हत्या हुई थी, जिसमें दो मुकदमे दर्ज हुए थे। 
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एक मुकदमा मुकेश पक्ष ने मृतक देवेंद्र पक्ष पर दर्ज कराया था, जिसमें कहा गया था कि देवेंद्र अपने परिजनों संग उनके घर डकैती डालने आया था। इस दौरान बचाव में देवेंद्र की मौत हो गई, जबकि जांच में तस्वीर साफ होने पर दूसरा मुकदमा देवेंद्र की हत्या का दर्ज हुआ। जिसमें सोनपाल, सत्यपाल, मुकेश, ब्रजपाल, छत्रपाल नामजद किए गए। 

इस विवेचना में पुलिस ने सोनपाल, सत्यपाल, मुकेश और ब्रजपाल को तो जेल भेज दिया, जबकि छत्रपाल फरार रहा। पुलिस ने छत्रपाल के खिलाफ कुर्की कार्रवाई करते हुए उसे भगोड़ा घोषित कर सभी के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी, जिसमें छत्रपाल को फरार दिखाया। 

इसके चलते छत्रपाल की पत्रावली अलग कर बाकी के खिलाफ ट्रायल शुरू हो गया। दौरान-ए-सत्र परीक्षण सोनपाल और ब्रजपाल की हत्या हो गई, जबकि वर्ष 1996 में एडीजे-5 की अदालत ने सत्यपाल व मुकेश को बरी कर दिया। मगर छत्रपाल उसके बाद से आज तक फरार ही रहा। 

जानकार बताते हैं कि छत्रपाल स्तर से थाना पुलिस स्तर से कोई साठ-गांठ की गई और जिससे उसकी फाइल पर संज्ञान ही नहीं हो सका। कालांतर में लोग यह मानकर बैठ गए कि सभी लोग बरी हो गए। हो सकता है कि छत्रपाल भी बरी कर दिया गया होगा। इसलिए छत्रपाल आराम से गांव में ही रहकर नौकरी करने लगा। 

अब आकर छत्रपाल के विरोधियों को इस पुराने घटनाक्रम की कुछ सच्चाई पता लगी तो एडीजे-5 की अदालत में पैरवी करते हुए विनीत पुत्र जगतपाल निवासी बाजौता ने एक याचिका दायर की। जिस पर अदालत ने बताया कि जब निचली अदालत ने मामले में संज्ञान नहीं लिया तो वह ट्रायल कैसे शुरू कर सकते हैं। 

इस पर विनीत ने अधिवक्ता चौ.सत्यवीर सिंह की मदद से सीजेएम न्यायालय में याचिका दायर की, जिस पर अदालत ने रिकार्ड से पूरी पत्रावली निकलवाई तो सच्चाई सामने आ गई। अब आकर अदालत ने छत्रपाल की फाइल परसंज्ञान लेकर उसके खिलाफ वारंट जारी किए। 

मगर थाना पुलिस स्तर से वारंट पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इस मामले में सीजेएम न्यायालय ने एसएसपी को पत्राचार किया और खुद विनीत ने भी एसएसपी को शिकायती पत्र दिया। इस मामले में एसपी देहात के निर्देश पर सीओ खैर को लगाया गया।

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