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जेईई मेंस में प्रयागराज की शिवानी ने मारी बाजी

Tue, 30 Apr 2019 01:20 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 30 Apr 2019 01:20 AM IST
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sevani  get success in JEE MENS
jee main 2019

पिछले साल सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में जिले में टॉपर रहीं शिवानी वर्मा ने जेईई मेंस में भी अच्छा प्रदर्शन किया और उन्हें ऑल इंडिया 2180वीं रैंक हासिल हुई है। उनके साथ ही प्रयागराज के शांतनु मिश्र, मोहम्मद सुफियान अंसारी समेत कई मेधावियों का जेईई मेंस मेंस में चयन हुआ है।

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महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर की छात्रा रहीं शिवानी वर्मा ने वर्ष 2018 में सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में जिले में पहला स्थान हासिल किया थ। बारहवीं में उन्हें 98.2 फीसदी अंक हासिल हुए थे। जेईई मेंस में शिवानी को 99.839 पर्सेंटाइल प्राप्त हुए हैं। शिवानी के पिता डॉ. शेखर वर्मा ट्रिपलआईटी में प्रोफेसर हैं और मां अपर्णा वर्मा ग्रहणी हैं।
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बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद शिवानी ने घर में रहकर सेल्फ स्टडी की और सफलता अर्जित की। इसके अलावा दरियाबाद के रहने वाले मोहम्मद सुफियान अहमद ने 3487वीं रैंक हासिल की है। सुफियान ने इविंग क्रिश्चियन पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की है और सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में उन्हें 93.8 फीसदी अंक मिले थे। सुफियान के पिता मोहम्मद अहमद चौक में व्यवसायी हैं जबकि मां शाइस्ता ग्रहणी हैं।
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वहीं, रसूलाबाद के रहने वाले शांतनु मिश्र भी महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर के छात्र रहे हैं। बारहवीं में उन्हें 91.2 फीसदी अंक प्राप्त हुए थे। शांतनु को ऑल इंडिया 5046वीं रैंक हासिल हुई है। शांतनु को 99.57 पर्सेंटाइल मिले हैं। उनके पिता डॉ. केपी मिश्र चिकित्सक हैं और मां रेखा मिश्रा गृहणी हैं।  


नए फार्मूले से बिगड़ी रैंक
 पिछले साल प्रयागराज के प्रियदर्शी सिंह को जेईई मेंस में 261 अंक हासिल हुए थे और उनकी रैंक 1049वीं थी और इस बार सुफियान अहमद को 268 अंक मिले और रैंक 3487वीं रही। ऐसा क्यों, इस सवाल के जवाब में विशेषज्ञों का कहना है कि नए फार्मूेल से रैंक बिगड़ गई है। पहले यह परीक्षा सीबीएसई के जिम्मेदारी। पहली बार जेईई मेंस का आयोजन नेशलन टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कराया। पहले परीक्षा ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों मोड में होती थी लेकिन इस बार केवल ऑनलाइन मोड में परीक्षा हुई। कुल आठ प्रकार के पेपर आए, जिनमें कुछ कठिन तो कुछ सरल पेपर थे। इस संतुलित करने के लिए नॉर्मलाइजेशन फार्मूला लागू किया गया और इसी फॉर्मूले के कारण रैंक बिगड़ गई।

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