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रक्तदान कर बनाया लिम्का बुक रिकार्ड
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 11 Jun 2014 01:16 PM IST
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सिटी ब्यूटीफुल में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें रक्तदान का जुनून सवार है। पीजीआई के बायोकेमेस्ट्री लैब के टेक्नीकल असिस्टेंट अश्विनी मुंजाल उस जमाने से ब्लड डोनेट कर रहे हैं, जब रक्तदान करना शरीर के लिए कमजोरी माना जाता था। वे सभी भ्रांतियों को दूर करते हुए अब तक 124 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं।
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उनका लक्ष्य हर साल चार बार ब्लड डोनेट करना है। जैसे ही तीन महीने का पीरियड खत्म होता है वे अगली बार की डोनेशन के लिए तैयारी शुरू कर देते हैं।
साल 2000 में लिम्का बुक आफ रिकार्ड ने उनके जज्बे को सलाम कर उन्हें सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनमें समाजसेवी की लगन थी।
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अब ऑपरेशन की इतनी अच्छी तकनीक आ गई है कि सर्जरी के दौरान खून काफी कम बहता है, लेकिन इसके विपरीत अब एक्सीडेंट बढ़ गए हैं तो थैलीसीमिया जैसी बीमारी भी है। इसलिए रक्त की हमेशा ही कमी रहती है।
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उन्होंने कहा कि जब तक वे मेडिकल फिट रहेंगे तब तक रक्तदान करते रहेंगे। यदि लोग साल में एक भी बार रक्तदान कर दें तो खून की कमी से दम तोड़ने वाले मरीज बच जाएंगे।
उनके परिवार में भी खुशियां लौट आएंगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि 14 जून को पीजीआई के जाकिर हाल में लगने वाले रक्तदान में कैंप शहरवासी जरूर आएं।