फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   meet, asia number 2 cyclist abhishek

'चैंपियन बनने को हौंसला चाहिए कोच नहीं'

Mon, 07 Jul 2014 01:26 PM IST
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 07 Jul 2014 01:26 PM IST
विज्ञापन
meet, asia number 2 cyclist abhishek

हौसले से बड़ा कोई दोस्त या गुरु नहीं। यह साबित कर दिखाया है चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में रहने वाले अभिषेक ने। अभिषेक पिछले सात साल से साइक्लिंग कर रहे हैं। इनका कोई भी कोच नही है। इंटरनेट के माध्यम से साइक्लिंग की जानकारी जुटाई और उसे ही फोलो किया। उन्होंने बताया कि कंपीटीशन नजदीक आते वे अभ्यास में पूरी तरह जुट जाते हैं। इसके लिए रात 3 बजे ही सुखना लेक वाली सड़क पर प्रैक्टिस करते हैं।

विज्ञापन


तेइस वर्षीय अभिषेक कंप्यूटर साइंस के छात्र हैं। बचपन से ही उनके दाहिने पैर में प्रॉब्लम है। वे इस पैर पर भार नहीं डाल सकते और बिना स्टिक के नहीं चल सकते। एक दिन साइकिल चलानी शुरू की और उसने उनके पैर की कमी को पूरा कर दिया। अभिषेक को यह इतना भाया कि उसने लगातार अभ्यास शुरू कर दिया।
विज्ञापन


एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्होंने स्टेट लेवल साइक्लिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। पहले कुछ मुश्किलें आईं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसी हौसले ने उन्हें बना दिया एशिया का नंबर-2 साइक्लिस्ट। अब उन्हें मलेशिया में अगस्त में होने वाली एशियन साइकिल चैंपियनशिप में देश की ओर से हिस्सा लेने का मौका मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दिल्ली में चमका नाम:
दिल्ली में 2013 में एशियन साइकिल चैंपियनशिप हुई। इसमें एशिया के नंबर-1 खिलाड़ी शेखूदीन को कड़ी टक्कर देने में कामयाब रहे और दूसरे स्थान पर आए। वे भारत के नंबर वन साइक्लिस्ट हैं।


उधार की साइकिल से लिया कंपीटीशन में हिस्सा :
अभिषेक ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर में हिस्सा लेने के लिए प्रोफेशनल साइकिल की जरूरत होती है। इसकी कीमत करीब सात लाख रुपये है। वे इसे खरीदने में असमर्थ हैं। उनके पास देश में बनी 7500 रुपये की साइकिल है और वे उसी से अभ्यास करते हैं। एशियन चैंपियनशिप में उन्होंनेअपने दोस्त की प्रोफेशनल साइकिल लेकर हिस्सा लिया था। अभिषेक के पिता पुलिस में थे। उनके देहांत के बाद मां को उनकी जगह नौकरी मिली और उन्हीं की कमाई से घर चलता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed