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'गोल्फ के साथ खिलती है मेरी जिंदगी'
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 07 Sep 2014 04:42 PM IST
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जिंदगी तो सभी जीते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बढ़ती उम्र में भी दूसरों केलिए मिसाल बनके रहते हैं। हम बात कर रहे हैं 91 वर्षीय कैप्टन शमशेर सिंह जोकि गोल्फ के दम पर आज भी फिट हैं।
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शमशेर सिंह शुरू में एथलीट रहे और क्रॉस कंट्री में हिस्सा लेते थे। इसके साथ ही 1960 से गोल्फ खेलना शुरू किया था। तब से लेकर आज तक 200 से अधिक टूर्नामेंट में मेडल और ट्राफियां जीत चुके हैं।
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इस साल चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में खेले गए 2014-15 मेडल राउंड सीरीज में रनर अप ट्राफी जीतकर अपने जिंदादिली का लोहा मनवा चुके हैं।
ये है रुटीन
पिछले 40 सालों से शमशेर सिंह की जिंदगी की ऐसी कोई सुबह नही निकली जब इन्होंने गोल्फ नहीं खेला हो। गोल्फ के प्रति इस कदर जनून है कि सुबह पांच बजे उठाकर तैयार हो जाते हैं।
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इसके बाद खुद ड्राइव कर सीधे गोल्फ क्लब पहुंच जाते हैं। वहां पर 6.30 बजे से लेकर 9.30 बजे तक अपने साथियों के साथ गोल्फ खेलते हैं।
शमशेर सिंह ने बताया कि गोल्फ ही मेरे लिए सबकुछ है। इस गेम के जरिए आज भी अपने आप को पूरी तरह फिट और तंदरुस्त रखता हूं।
इन्होंने बताया कि आज भी वह गोल्फ कोर्स पर खेलने वक्त जेब में बादाम और काजू रखते हैं। इनको खाते हुए गोल्फ का आनंद लेते हैं।
शमशेर सिंह की तीन बेटियां शादीशुदा हैं। एक बेटा विदेश में है। पिछले 6 साल पहले इनकी पत्नी नहीं रही। वह अपने घर का काम खुद करते है। बाहर का खाना भी नहीं खाते। खाना भी खुद बनाकर खाते हैं।