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'इस गार्डन में बसती है मेरी जान'

Mon, 01 Sep 2014 03:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 01 Sep 2014 03:48 PM IST
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25 years old garden owner interview

सेक्टर-9 की कोठी नंबर-306, जितनी हरियाली एडवोकेट रविंद्र कृष्ण के घर के बाहर नजर आती है, उतनी ही अंदर भी है। घर को रॉयल लुक दे रहे हैं बाहर लगे रॉयल पाम।

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एक-दो नहीं, बल्कि 22 रॉयल पाम घर के बाहर लगे हैं, जिन्हें एडवोकेट रविंद्र कृष्ण ने खुद बढ़ते हुए देखा है। ये पाम उन्होंने 25 साल पहले लगाए थे, जो अब कई मीटर ऊंचे हो गए हैं। एडवोकेट कृष्ण कहते हैं ‘ये पाम और गार्डन ही मेरी जान है।’
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रविंद्र ने ये घर 1977 में बनवाया था। आज भी वे अपना बहुत सा समय बगीचे की देखभाल में बिताते हैं। रोज सुबह पांच बजे उठकर बगीचे की देखभाल में जुट जाते हैं। उनके लगाव और मेहनत का ही नतीजा है कि बगीचे की खूबसरती लोगों का ध्यान बरबस ही अपनी ओर खींच लेती है।
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घर के अंदर भी कई तरह के पाम लगे हैं। कई खूबसूरत पौधे और फूल बगीचे की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। बगीचे में गुलदाउदी के भी कई पौधे लगे हैं। एडवोकेट रविंद्र कृष्ण शहर के नामी वकील हैं और समाज सेवा भी सक्रिय रहते हैं। हर साल 24 दिसंबर को वह अपने जन्मदिन पर रक्तदान शिविर भी लगाते हैं।

लगाए हैं ये प्लांट
रविंद्र कृष्ण के घर पर कई किस्म के प्लांट हैं। इनमें से कुछ दुर्लभ भी हैं। उन्होंने बगीचे में ट्रायंगल पाम, फाइकस पांडा, बरबीना, क्रोटन, बुकारनिया नॉलिना, सिल्वर जुनेपर, बॉटल ब्रश, गोल्डन फाइकस, रोज क्रिपर, हार शृंगार, अशोक और क्रिसमस ट्री आदि लगाए हुए हैं।

चीफ जस्टिस ने गिफ्ट किया प्लांट

कर्नाटक के चीफ जस्टिस पीसी जैन ने कई साल पहले उन्हें कुछ प्लांट गिफ्ट किए थे। वह खुद भी कई लोगों को प्लांट गिफ्ट कर देते हैं। अब उन्होंने आंध्र प्रदेश से चंदन और केरल से भी कुछ प्लांट मंगवाए हैं।


देखभाल मांगते हैं पौधे
रविंद्र कहते हैं कि सभी पौधों को लगाने का तरीका लगभग समान ही होता है। बस जरूरत होती है उनकी सही देखभाल की। उनका कहना है कि अधिकतर लोग पौधे लगाकर भूल जाते हैं। इससे पौधा सूख जाता है। उनका कहना है कि समय-समय पर पौधों की ट्रिमिंग बहुत जरूरी है।

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