डीयू में केजरी के फ्लॉप शो के बाद जेएनयू में हिट हुए योगेंद्र यादव
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में बड़ा बदलाव आया है, क्योंकि लेफ्ट के लाल किले में पहली बार आम आदमी पार्टी से अलग हुए योगेंद्र यादव के स्टूडेंट फॉर स्वराज ने बाजी मारी है।
स्कूल ऑफ लैंग्वेज के काउंसलर पद पर दिलीप कुमार नाम के प्रत्याशी ने आइसा के बीच प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दी है। जेएनयू को लेफ्ट पार्टियों का गढ़ माना जाता है।
क्योंकि वहां वामपंथी संगठनों से जुड़े प्रत्याशी ही छात्रसंघ में परचम लहराते रहे हैं। वामपंथी विचारधारा के चलते अभी तक एबीवीपी और एनएसयूआई कभी भी सेंट्रल पैनल पर काबिज नहीं हो पाए थे।
एसएफएस ने आइसा को दी पटखनी
हालांकि प्रो. आनंद के आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद लाल दुर्ग के कैंपस की विचारधारा भी बदली और छात्रों ने झाडू का दामन थाम लिया।
इसी बीच योगेंद्र, आनंद के आम आदमी पार्टी से अलग होने के चलते जेएनयू में सीवाईएसएस चुनावी मैदान में नहीं उतर सका। क्योंकि छात्रों का सहयोग नहीं मिल पाया।
हालांकि प्रो. आनंद कुमार की साफ-सुथरी छवि के चलते योगेंद्र यादव के संगठन स्टूडेंट फॉर स्वराज से जुड़े दिलीप ने आइसा को पटखनी दे ही दी।
जेएनयू में शनिवार देर शाम स्कूल काउंसलर पदों के रिजल्ट आने शुरू हुए। सबसे पहले स्कूल ऑफ लैंग्वेज के रिजल्ट आए हैं। कुल पांच पदों में से चार पर आइसा को जीत मिली है।