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योग, फाइन आर्ट्स और संगीत बिना बीएड नहीं
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 11 Mar 2015 10:58 AM IST
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बीएड करके मास्साब बनना अब आसान नहीं होगा। अब हर बीएड करने वाले युवा को योग, फाइन आर्ट्स और संगीत भी पढ़ना होगा।
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राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने बीएड की अवधि दो वर्ष करने के साथ इसमें कई बड़े बदलाव किए हैं। एनसीटीई से जारी नए सिलेबस के मुताबिक दो वर्षीय बीएड में फोकस इस पर है कि इसकी पढ़ाई करने वाला छात्र व्यवहारिक तौर पर पेशे के हिसाब से फिट हो।
एनसीटीई ने कॉलेजों को दिए यह निर्देश
लिहाजा ट्रेनिंग 40 दिन से बढ़ाकर 20 हफ्ते की कर दी गई है। इसमें चार हफ्ते प्रथम वर्ष में और 16 हफ्ते का प्रशिक्षण द्वितीय वर्ष में होगा। एनसीटीई ने कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि प्रशिक्षण के लिए वह आसपास के दस-दस स्कूलों से टाईअप कर लें।
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वहां के शिक्षकों को वे अपने कॉलेज में भी बुलाएं। योग, फाइन आर्ट्स और संगीत की शिक्षा भी हर भावी शिक्षक के लिए अनिवार्य कर दी गई है। एक वर्षीय बीएड में ज्यादा फोकस लिखित परीक्षा पर था।
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दस फीसदी अंक ही प्रैक्टिकल असेसमेंट के होते थे, लेकिन नए सिलेबस के हिसाब से 20 से 30 प्रतिशत अंक प्रैक्टिकल असेसमेंट के होंगे। भावी शिक्षकों को समाज के प्रति भी संजीदा बनाया जाएगा।
नया बीएड पाठ्यक्रम और अवधि बढ़ने से केवल वही छात्र इसमें दाखिला लेने आएंगे, जो असल में बीएड करना चाहते हैं। कम वक्त में बीएड की डिग्री लेने का इरादा रखने वाले छात्रों के लिए राह आसान नहीं रह गई है।
- सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट