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अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे प्रदेश में छोटे उद्योग
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 29 Apr 2014 10:43 PM IST
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सांध्यकालीन अध्ययन केंद्र में छोटे, लघु और मध्यम उद्योग और वित्तीय संस्थान विषय पर आयोजित संगोष्ठी मंगलवार से शुरू हो गई।
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शुभारंभ करते हुए विवि के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थतियों को देखते हुए छोटे-मझौले और लघु उद्योगों का प्रदेश की आर्थिकी में विशेष महत्व है।
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उन्होंने कहा कि कहा कि हिमाचल प्रदेश में इन उद्योगों के विकास पर ध्यान देने की जरूरत है। बीते कुछ वर्षों से यह संस्थाएं बजूद खोती जा रही है। यही वजह है कि बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान उन्हें आर्थिक मदद देने में रुचि नहीं ले रहे है।
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हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी लघु व कुटीर उद्योगों आधारित है। इन उद्योगों ने ग्रामीण क्षेत्रों में से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ी है। इनको प्रोत्साहित करने के लिये सही नीतियों के अभाव के कारण चम्बा का रूमाल, कुल्लू की शॉल, किन्नौर की टोपी और सिरमौर का लोईया अपनी पहचान खोते जा रहे हैं।
संगोष्ठी में हिस्सा ले रहे कई विशेषज्ञ
सेंटर फार इवनिंग स्टडीज के वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में संयोजक डा. देवेंद्र शर्मा ने बताया कि इसमें अन्य प्रदेशों से आए लोग भी भाग ले रहे है। संगोष्ठी में पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के वाणिज्य विभाग के प्रो. मंजीत सिंह ने छोटे, लघु तथा मझौले उद्योगों की वर्तमान स्थिति पर जानकारी दी।
संगोष्ठी में सेंटर की प्राचार्य डा. मंजू बाली ने सभी प्रतिभागियों को स्वागत किया। इस दौरान एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया। संगोष्ठी में विवि के प्रो. सुरेश कुमार, प्रो. देस राज गुप्ता, प्रो. सुरेंद्र सिंह नारटा, प्रो.बीके बाली के अतिरिक्त इस केन्द्र के प्राध्यापक और शोध छात्र भी मौजूद रहे।