{"_id":"16de5b48-ef8e-11e2-b293-001e671f54a0","slug":"will-already-know-illness","type":"story","status":"publish","title_hn":"न्यू रिसर्चः पहले ही पता चल जाएगी 'बीमारी'","category":{"title":"Campus Archives","title_hn":"कैंपस आर्काइव","slug":"campus-archives"}}
न्यू रिसर्चः पहले ही पता चल जाएगी 'बीमारी'
देहरादून/ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jul 2013 03:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब किसी भी बीमारी का पता पहले ही लगाया जा सकता है। मसलन, ग्लाइको सिलेटेड हीमोग्लोबिन से छह माह पहले ही डायबिटीज की जानकारी मिल सकेगी।
विज्ञापन
बायोमार्कर्स से मेडिकल साइंस में आने वाली नई क्रांति की संभावनाओं को लेकर एजसीआरआर मेडिकल कॉलेज में ‘नेशनल सिंपोजियम ऑन बायोमार्कर्स इन हेल्थ एंड डिजीज : बेंच टू बेडसाइड’ शुरू हुआ।
विज्ञापन
इस मौके पर केंद्र सरकार के स्वास्थ्य सचिव डा. वीएम कटोच ने कहा कि बायोमार्कर्स एक नई क्रांति है, जिसमें बीमारियों का न केवल पहले पता चल जाएगा बल्कि इसमें आ रहे बदलावों से कई दुष्परिणामों से पहले ही सतर्क हुआ जा सकेगा।
विज्ञापन
इससे पहले एसजीआरआर मिशन के अध्यक्ष महंत देवेंद्र दास ने बायोमार्कर्स के लाभ पर विचार व्यक्त किए। मिशन के उपाध्यक्ष प्रो. एसपी थपलियाल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास की गति धीमी है, लेकिन अगर प्राइवेट सेक्टर के साथ सरकार हाथ मिलाए तो इसे रफ्तार मिल सकती है।
सिंपोजियम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सीकोलॉजी रिसर्च लखनऊ के पूर्व निदेशक डा. पीके सेठ ने बायोमार्कर्स फॉर सेलेक्टेड सीनीएस, आंध्र प्रदेश के डा. वाईएन राव ने न्यू परसेप्शन ऑफ लोकेट एंड एलडीएच डिहाईड्रेशन पर अपना शोध प्रस्तुत किया।
इस मौके पर डा. आरके सिंह, डा. वीए बौड़ाई, डा. अमित कुमार, डा. संजीव मित्तल और डा. तारिक आदि मौजूद रहे।