फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   vijay kumar invent bike engine

वॉचमैन के बेटे ने बनाया 'करामाती इंजन'

Thu, 12 Jun 2014 08:09 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 12 Jun 2014 08:09 AM IST
विज्ञापन
vijay kumar invent bike engine

12वीं के बाद मुफलिसी ने उसके कदम थाम दिए, लेकिन हौसलों ने कुछ यूं उड़ान भरी कि बडे़-बड़े इंजीनियरों भी पीछे छूट गए।

विज्ञापन


वॉचमैन के बेटे विजय कुमार का दावा है कि वे एक ऐसा इंजन तैयार कर चुके हैं, जिसके जरिए आप अपनी बाइक को मनमुताबिक माइलेज या स्पीड दे सकते हैं।

उन्हें इसका पेटेंट भी हासिल हो चुका है। विजय के मुताबिक उनका इंजन बाइक बाजार में उतरने के बाद इंडस्ट्री में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा।

वॉचमैन के बेटे ने रचा नया इतिहास

vijay kumar invent bike engine

किशननगर एक्सटेंशन निवासी विजय के पिता किशन सिंह वॉचमैन की नौकरी करते हैं, जबकि दो भाई टैक्सी चालक हैं।

विजय ने एसजीआरआर बिंदाल से वर्ष 2007 में दसवीं पास की। इसी दौरान स्कूलों की साइंस एग्जीबिशन में ऐसी मिसाइल बनाई, जो एक बटन दबाते ही 30 फीट तक हवा को चीर गई।

एग्जीबिशन में विजय ऑन द स्पॉट विजेता बने। वक्त के साथ आर्थिक तंगी ने परिवार को घेर लिया। तो वर्ष 2009 में 12वीं ओपन बोर्ड से करनी पड़ी।

विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे तैयार किया इंजन

vijay kumar invent bike engine

विजय ने बाजार से 150-150 सीसी के दो चलताऊ इंजन खरीदे। दोनों को जोड़कर डुअल इंजन तैयार किया।

काम मुश्किल होने के नाते एल्युमीनियम का काम करने वाली एक कंपनी की मदद ली। फिर इग्नीशन का नया सिस्टम डेवलप किया।

विजय इसे ‘वेब डुअल टेक्नोलॉजी’ कहते हैं। विजय ने बताया कि इंजन में एक खास बटन लगाया गया है, जिसे दबाकर 70 किमी प्रति लीटर की माइलेज मिल सकती है।

तब इंजन की स्पीड लिमिटेड रहेगी, जबकि यही बटन आपको 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का मजा भी देगा। इस कंडीशन में माइलेज जरूर घट जाएगा। इंजन में दो साइलेंसर लगे हैं।

विज्ञापन

मैकेनिक भी रह गया भौंचक्का

vijay kumar invent bike engine

विजय ने बताया कि बाइक में इंजन में फिट करने को मैकेनिक बुलाया तो वह भी चौंक गया।

पुरानी बाइक में इंजन फिट करने के बाद पहले खुद ट्रायल लिया। फिर पेटेंट के लिए भेजा, जहां इसे अप्रूव कर दिया गया।  

विजय ने बताया कि वह आईआईटी रुड़की, जीबी पंत यूनिवर्सिटी, ग्राफिक एरा विवि, डीआईटी यूनिवर्सिटी के अलावा कई तकनीकी संस्थानों के छात्रों को प्रोजेक्ट बनाकर देते हैं।

एक प्रोजेक्ट के लिए वे कॉलेजों से करीब ढाई से तीन हजार और स्कूलों से करीब एक हजार रुपए लेते हैं। इसी से उनका खर्च चलता है। दून के कई केंद्रीय विद्यालयों के छात्रों के लिए भी वे मॉडल तैयार करते हैं।

स्टीव जॉब्स हैं प्रेरणा

vijay kumar invent bike engine

विजय ने घर के एक हिस्से को अपनी लैब बना रखा है। इसमें उनके आदर्श ‘एप्पल’ के संस्थापक स्व. स्टीव जॉब्स की तस्वीर लगी है।

विजय ने बताया कि स्टीव जॉब्स भी शुरुआती दिनों में ऐसे ही गैराज में बैठकर प्रयोग करते थे। विजय रोजाना जॉब्स के वीडियो भी सुनते हैं।

इंजीनियर न बन पाने का मलाल

विजय के मुताबिक उन्होंने एक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया था। कॉलेज की शर्त थी कि वे उनके लिए प्रोजेक्ट बनाएंगे तो पढ़ाई मुफ्त हो जाएगी। लेकिन एक साल में ही कॉलेज ने शर्त तोड़ दी।

उधार लेकर कॉलेज की फीस तो जमा कर दी, लेकिन इंजीनियरिंग छोड़नी पड़ी। विजय को आज भी इंजीनियरिंग न कर पाने का मलाल है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed