वत्सला बनीं केजीएमयू की मेडल क्वीन, अनन्य ने भी जीते 12 पदक
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केजीएमयू के एमबीबीएस 2010-15 बैच की कानपुर की वत्सला कटियार ने केजीएमयू के प्रतिष्ठित हीवेट व चांसलर समेत 19 मेडल पर कब्जा जमाया है। वहीं लखनऊ के विकासनगर के रहने वाले अनन्य गुप्ता ने 12 मेडल पर कब्जा जमाया है।
अनन्य को फॉर्माकोलॉजी, फॉरेंसिक मेडिसिन, मेडिसिन, ईएनटी में गोल्ड मेडल मिला है। राज्यपाल व कुलाधिपति राम नाईक और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 20 दिसंबर को दीक्षांत समारोह में दोनों को सम्मानित करेंगे।
वत्सला ने सर्जरी पीडियाट्रिक, मेडिसिन और गायनी में टॉप किया
कानपुर के राजीवनगर की रहने वाली वत्सला को फाइनल प्रोफेशनल एमबीबीएस पार्ट टू में सर्वाधिक अंक के लिए हीवेट गोल्ड मेडल और सभी प्रोफेशनल कोर्स में सबसे अधिक मार्क्स के लिए चांसलर्स मेडल दिया जाएगा। एमबीबीएस कोर्स में सर्जरी पीडियाट्रिक, मेडिसिन और गायनी में टॉप किया।
अनन्य चार सब्जेक्ट में रहे टॉप स्कोरर
अनन्य मेडिसिन, फॉरेंसिक मेडिसिन, फॉर्मोकोलॉजी और गायनेकोलॉजिस्ट सब्जेक्ट में टॉप स्कोरर रहे हैं। अनन्य ने डॉ. आर.के.डी. मिश्रा मेमोरियल सेंटनरी गोल्ड मेडल, सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर इन मेडिसिन, सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर इन सर्जरी, डॉ. गोविला गोल्ड मेडल, वेदावती शैला गोल्ड मेडल,पीएमएस एसोसिएशन गोल्ड मेडल, सिल्वर जुबली रीयूनियन (1949-1954) एमबीबीएस बैच बुक प्राइज समेत 12 मेडल पर कब्जा किया है।
मैंने तो सोचा भी न था इतने मेडल मिलेंगे
19 मेडल मिलने से उत्साहित वत्सला कहती है- एमबीबीएस कोर्स जॉइन करते वक्त सिर्फ डॉक्टर बनने का सपना लेकर आई थी। कभी भी टॉप करने की सोच से पढ़ाई नहीं की, पर इस सपना के पूरा होने के साथ अब यूनिवर्सिटी के 19 मेडल पर मेरा कब्जा है।
पिता वीरेंद्र कुमार कटियार व्यवसायी हैं। मां नीलम कटियार चाइल्ड डवलपमेंट प्रोजेक्ट अफसर हैं। मैंने रेग्युलर क्लास अटेंड करने के साथ हॉस्टल में छह से आठ घंटे की पढ़ाई की। पीजी एमडी मेडिसिन से करना चाहती हूं। पीजी एडमिशन के लिए भी तैयारी चल रही है। कोशिश होगी कि केजीएमयू में पीजी का मौका मिले।
बाथरूम में भी पढ़ाई करता
अनन्य बताते हैं कि पिता डॉ. एके गुप्ता सिविल अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट हैं। मां रश्मि गुप्ता अलीगंज बीएमसी में महिला रोग विशेषज्ञ हैं। परिवार और रिश्तेदारों में काफी लोग डॉक्टर हैं और पांच लोग जॉर्जियन हैं। मामा डॉ. विवेक गुप्ता ओपोलो दिल्ली में कार्डियोलॉजिस्ट हैं तो मामी डॉ. राखी गुप्ता वहीं पर महिला रोग विशेषज्ञ हैं। नाना प्रो. एमएल गुप्ता फॉर्माकोलॉजी डिपार्टमेंट से सेवानिवृत्त हैं।
इसलिए इस पेशे के प्रति शुरू से रुझान रहा है। फर्स्ट ईयर से ही टॉप करता रहा। चौथे वर्ष तक लगातार गोल्ड मेडल मिला। रोजाना 10 से 12 घंटे की रेग्युलर पढ़ाई करता हूं। बाथरूम में भी किताब लेकर पढ़ता। पीजी रेडियोलॉजी से करने की चाहत है।
मुझे रिसर्च में काफी रुचि है। रूबेला वायरस पर मैंने रिसर्च किया और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने उसपर मुहर लगाई। शानदार फाइंडिग्स के लिए अनन्य को दस हजार रुपये कैश और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया था। मौजूदा समय में वो ब्रेस्ट कैंसर पर रिसर्च कर रहे हैं।