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मार्कशीट की तकनीक में यूटीयू हुआ फेल
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 10 Apr 2014 10:32 AM IST
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उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय मार्कशीट बनाने में तकनीकी तौर पर फेल हो गया है। हालात यह हैं कि पांच साल से छात्र मार्कशीट के लिए कालेज और विवि के बीच चक्कर काट रहे हैं।
विवि का तर्क है कि सॉफ्टवेयर में कुछ खामियां होने की वजह से मार्कशीट तैयार नहीं हो पाई हैं। इसी वजह से विवि लंबे समय से छात्रों को हाथ से बनी अस्थायी मार्कशीट जारी कर रहा है।
चक्कर काट रहे छात्र
तकनीकी विवि से जुड़े एसजीआरआर पैरामेडिकल कालेज के दो सौ से ज्यादा छात्र मार्कशीट के लिए चक्कर काट रहे हैं। कालेज के एमएससी और बीएससी पैरामेडिकल कोर्स के छात्रों ने बताया कि कालेज उनका पूरा रिकार्ड विवि को भेज चुका है लेकिन विवि या तो मार्कशीट नहीं दे रहा है और अगर देता भी है तो उसमें तमाम गलतियां होती हैं।
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2013 से एक भी सेमेस्टर की मार्कशीट नहीं
उत्तरांचल कालेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड बायोमेडिकल साइंसेज के छात्रों ने बताया कि वर्ष 2013 से अब तक विवि ने एक भी सेमेस्टर की मार्कशीट जारी नहीं की है।
उन्होंने कालेज से संपर्क किया तो पता चला कि विवि ने ही मार्कशीट नहीं भेजी है। ऐसे कई और कालेज हैं, जिनके छात्र विवि की लापरवाही के चलते परेशान हैं।
सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी से परेशानी
दरअसल तकनीकी विवि में मार्कशीट बनाने वाला सॉफ्टवेयर ही फेल हो गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह सॉफ्टवेयर कई साल पुराना है।
पहले इसमें कालेजों द्वारा भेजी गई सूचनाओं का फॉर्मेट फिक्स करते ही मार्कशीट तैयार हो जाती थी। लेकिन, इस सॉफ्टेवयर को अपडेट नहीं किया गया।
इस वजह से मार्कशीट में कभी सीरियल नंबर गलत आ जाता है तो कभी अंक और नाम। इस संबंध में कई कालेज विवि को आगाह भी कर चुके हैं।
छात्रों पर भारी पड़ रही लापरवाही
तकनीकी विवि की इस नाकामी और लापरवाही का असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है। नौकरी के लिए आवेदन करते समय जब वे कंपनी में अपना रेज्यूमे डॉक्यूमेंट्स के साथ पेश करते हैं तो हाथ से बनी मार्कशीट को संदिग्ध मानते हुए उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है।
अधिकारियों का है कहना
मार्कशीट बनाने का काम विवि का है। हमने इस संबंध में विवि को अवगत करा दिया है। उन्होंने जल्द हल का आश्वासन भी दिया है।
-रश्मि ढींगरा, प्राचार्य, एसजीआरआर पैरामेडिकल कालेज
मार्कशीट न मिलने के कारण छात्र परेशान हैं, लेकिन इसका समाधान विवि को ही करना है। विवि के पास कर्मचारियों की कमी भी देरी की एक वजह है।
-जीडीएस वार्ने, चेयरमैन, उत्तरांचल कालेज आफ टेक्नोलॉजी एंड बायोमेडिकल साइंसेज
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विवि का तर्क है कि सॉफ्टवेयर में कुछ खामियां होने की वजह से मार्कशीट तैयार नहीं हो पाई हैं। इसी वजह से विवि लंबे समय से छात्रों को हाथ से बनी अस्थायी मार्कशीट जारी कर रहा है।
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चक्कर काट रहे छात्र
तकनीकी विवि से जुड़े एसजीआरआर पैरामेडिकल कालेज के दो सौ से ज्यादा छात्र मार्कशीट के लिए चक्कर काट रहे हैं। कालेज के एमएससी और बीएससी पैरामेडिकल कोर्स के छात्रों ने बताया कि कालेज उनका पूरा रिकार्ड विवि को भेज चुका है लेकिन विवि या तो मार्कशीट नहीं दे रहा है और अगर देता भी है तो उसमें तमाम गलतियां होती हैं।
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2013 से एक भी सेमेस्टर की मार्कशीट नहीं
उत्तरांचल कालेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड बायोमेडिकल साइंसेज के छात्रों ने बताया कि वर्ष 2013 से अब तक विवि ने एक भी सेमेस्टर की मार्कशीट जारी नहीं की है।
उन्होंने कालेज से संपर्क किया तो पता चला कि विवि ने ही मार्कशीट नहीं भेजी है। ऐसे कई और कालेज हैं, जिनके छात्र विवि की लापरवाही के चलते परेशान हैं।
सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी से परेशानी
दरअसल तकनीकी विवि में मार्कशीट बनाने वाला सॉफ्टवेयर ही फेल हो गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह सॉफ्टवेयर कई साल पुराना है।
पहले इसमें कालेजों द्वारा भेजी गई सूचनाओं का फॉर्मेट फिक्स करते ही मार्कशीट तैयार हो जाती थी। लेकिन, इस सॉफ्टेवयर को अपडेट नहीं किया गया।
इस वजह से मार्कशीट में कभी सीरियल नंबर गलत आ जाता है तो कभी अंक और नाम। इस संबंध में कई कालेज विवि को आगाह भी कर चुके हैं।
छात्रों पर भारी पड़ रही लापरवाही
तकनीकी विवि की इस नाकामी और लापरवाही का असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है। नौकरी के लिए आवेदन करते समय जब वे कंपनी में अपना रेज्यूमे डॉक्यूमेंट्स के साथ पेश करते हैं तो हाथ से बनी मार्कशीट को संदिग्ध मानते हुए उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है।
अधिकारियों का है कहना
मार्कशीट बनाने का काम विवि का है। हमने इस संबंध में विवि को अवगत करा दिया है। उन्होंने जल्द हल का आश्वासन भी दिया है।
-रश्मि ढींगरा, प्राचार्य, एसजीआरआर पैरामेडिकल कालेज
मार्कशीट न मिलने के कारण छात्र परेशान हैं, लेकिन इसका समाधान विवि को ही करना है। विवि के पास कर्मचारियों की कमी भी देरी की एक वजह है।
-जीडीएस वार्ने, चेयरमैन, उत्तरांचल कालेज आफ टेक्नोलॉजी एंड बायोमेडिकल साइंसेज