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UTU की ये कैसी परीक्षा न अंकों का पता ना प्रश्नों का
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 05 Jan 2016 10:11 AM IST
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उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की एक और परीक्षा ने छात्रों को परेशानी में डाल दिया है। सोमवार को लॉ और फार्मेसी का पेपर था, लेकिन जो पेपर परीक्षार्थियों के हाथ में आया, उस पर ना तो प्रश्नों के प्रकार लिखे थे, ना ही प्रश्नों के अंक।
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नतीजतन छात्र यह तय ही नहीं कर पाए कि किस प्रश्न का कितने शब्दों में जवाब देना है। दूसरी ओर, कई केंद्रों पर प्रश्न पत्र देरी से पहुंचने की वजह परीक्षा करीब 45 मिनट देरी से शुरू हो पाई। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की प्रोफेशनल कोर्सेज की सेमेस्टर परीक्षाएं सोमवार से शुरू हुईं।
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इसके तहत पहले दिन एलएलबी तृतीय सेमेस्टर का लेबर एंड इंडस्ट्रियल लॉ और एमफार्मा प्रथम सेमेस्टर का पेपर था। जब परीक्षार्थियों के हाथ में प्रश्न पत्र आए तो वह चौंक गए। प्रश्न पत्र पर विवि ने लॉ के पेपर में सबसे ऊपर मैक्सीमम मार्क्स 70 और फार्मा के पेपर में 100 अंक प्रिंट किया था। लेकिन पेपर की आगे की डिटेल गायब थी। पेपर को सीधे सेक्शन में बांटा गया।
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पहले सेक्शन में दो सवाल। इनमें से कितने सवाल हल करने हैं, किस सवाल पर कितने अंक मिलेंगे, प्रश्न का उत्तर कितने शब्दों में देना है, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। पूरा पेपर खत्म होने के बाद छात्र इस बात से परेशान हैं कि जिस प्रश्न का उत्तर उन्होंने शॉर्ट में लिखा या लघु उत्तर दिया है, कहीं वह दीर्घ उत्तरीय न हो। छात्रों को चिंता है कि विवि की मार्किंग स्कीम की वजह से कहीं वह फेल न हो जाएं।
देरी से शुरू हुई परीक्षा
यूटीयू की लेटलतीफी का आलम यह है कि परीक्षा शुरू होने के समय तक पेपर उपलब्ध नहीं कराया गया। इस वजह से लॉ की परीक्षा कई केंद्रों पर करीब 45 मिनट देरी से शुरू हो पाई। पेपर में विलंब होने पर जब केंद्रों ने विश्वविद्यालय से संपर्क किया तो आनन-फानन में उन्हें ई-मेल से प्रश्न पत्र भेजा गया।
ऐसा होना चाहिए था पेपर
परीक्षा के नियमों के हिसाब से प्रश्न पत्र पर सबसे पहले निर्देश होने चाहिए। निर्देश में साफ लिखा होता है कि प्रश्न संख्या के अनुसार कहां तक के प्रश्न अति लघु उत्तरीय हैं, कहां तक के प्रश्न लघु उत्तरीय और कौन से प्रश्न दीर्घ उत्तरीय हैं। कई विश्वविद्यालय तो इन निर्देशों में ही यह भी बताते हैं कि किस प्रश्न का जवाब कितने शब्दों तक देना है।
साथ ही हर प्रश्न के सामने उसके अंक प्रिंट किए जाते हैं। जिससे परीक्षार्थी को पेपर हल करने में आसानी होती है और उसे मालूम होता कि किस प्रश्न का उत्तर देने पर उसे कितने अंक मिल सकेंगे।
परीक्षा से एक दिन पहले बदले केंद्र, छात्र परेशान
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) ने प्रोफेशनल कोर्सेज की परीक्षा शुरू होने से ठीक एक दिन पहले दो कॉलेजों से परीक्षा केंद्र हटा दिए। इस वजह से छात्र परेशान हुए और उन्हें करीब दस किलोमीटर दूर परीक्षा देने जाना पड़ा।
यूटीयू ने करीब दस दिन पहले प्रोफेशनल कोर्सेज की परीक्षाओं के लिए एसबीएस कॉलेज, बालावाला और सिद्धार्थ लॉ कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया था। सिद्धार्थ लॉ कॉलेज में ही लैंडमार्क इंस्टीट्यूट की भी परीक्षा होनी थी। विवि ने सूची जारी करते हुए बताया था कि किस कॉलेज के छात्रों की परीक्षा किस परीक्षा केंद्र पर होगी।
परीक्षाएं सोमवार से शुरू होनी थी, लेकिन एक दिन पहले अचानक विवि ने परीक्षा केंद्रों की नई सूची जारी कर दी। इसके तहत एसबीएस बालावाला का परीक्षा केंद्र करीब दस किलोमीटर दूर एसजीआरआर आईटीएस, पटेलनगर कर दिया गया। जबकि सिद्धार्थ और लैंडमार्क इंस्टीट्यूट का परीक्षा केंद्र बदलकर करीब दस किलोमीटर दूर जीआरडी इंस्टीट्यूट, राजपुर कर दिया गया।
सुबह जब छात्र परीक्षा के लिए कॉलेज पहुंचे तो उन्हें देरी से एडमिट कार्ड बांटे गए। इसके बाद जैसे-तैसे वह अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच पाए। छात्रों का कहना है कि अगर विवि को परीक्षा केंद्र बदलना था तो दस दिन पहले ही सूचित करता, ताकि वह उसी के मुताबिक खुद को तैयार रखते।
व्यवस्था नहीं सुधारी तो आंदोलन की चेतावनी
यूटीयू में तीन दिन पहले नारेबाजी और प्रदर्शन करने वाले वरिष्ठ छात्र नेता आदित्य चौहान सोमवार को कुलपति प्रो. पीके गर्ग से मिलने पहुंचे। उन्होंने कुलपति से दिए गए ज्ञापन पर कार्रवाई करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर विवि नींद से नहीं जागा तो वह उग्र आंदोलन करेंगे।
सोमवार को यूटीयू के कुलपति प्रो. पीके गर्ग से आदित्य चौहान ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ियों की वजह से प्रदेशभर के छात्र हैरान-परेशान हैं। ना तो उन्हें पेपर का पैटर्न सही मिल रहा है और ना ही सिलेबस। इस वजह से छात्र-छात्राओं पर फेल होने का खतरा बढ़ गया है।
उन्होंने कुलपति से सवाल पूछा कि शासन के आदेशों के बावजूद उपनल से असिस्टेंट एग्जाम कंट्रोलर पद पर रखे गए अरुण शर्मा को अब तक क्यों नहीं हटाया गया? जबकि नियमों के हिसाब से उपनल से यह भर्ती नहीं की जा सकती है।
उन्होंने कुलपति से सवाल किया कि प्रतिनियुक्ति पर बतौर फाइनेंस कंट्रोलर आए पीके जोशी की प्रतिनियुक्ति खत्म होने के बाद उन्हें किस आधार पर कुल सचिव का पदभार दिया गया है, जबकि विवि में नए फाइनेंस कंट्रोलर आ चुके हैं। कुलपति ने बताया कि शासन से मिले पत्र के आधार पर कुल सचिव को रखा गया है। उन्होंने अरुण शर्मा के संबंध में कोई जवाब नहीं दिया।
विवि प्रशासन ने यह दिया जवाब
लॉ के पेपर में गड़बड़ी, परीक्षा केंद्र एक दिन पहले बदलने और छात्र नेताओं के वार्ता करने के सवालों पर कुलपति प्रो. पीके गर्ग को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। उन्हें सभी मामलों की जानकारी एसएमएस से भेजकर पक्ष मांगा गया तो उन्होंने जवाब भेजा कि आज की परीक्षा बिल्कुल बढ़िया थी। अन्य जानकारी के लिए सीईओ या कुलसचिव से बात करें।
कुलसचिव पीके जोशी को फोन किया गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। विवि के सिस्टम के हिसाब से पेपर, संबंधित विषय का प्रोफेसर ही बनाता है। उन्हें यह बेसिक चीज देखनी चाहिए। दूसरी ओर, ऐसे मामले में परीक्षा नियंत्रक को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए था और छात्रों को बता देना चाहिए था कि कौन सा सवाल कितने अंकों का है। विवि में इस संबंध में बैठक करने के बाद ही कुछ फैसला लेगा।