CAT रिजल्ट: इन युवाओं ने लहराया उत्तराखंड का परचम
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प्रबंधन की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा कॉमन एडमिशन टेस्ट(कैट) के नतीजे शुक्रवार को जारी हो गए। परीक्षा में प्रदेश के होनहारों ने अपनी प्रतिभा से झंडा बुलंद किया है। इस बार खास बात यह रही कि टॉप स्कोरर में उत्तराखंड के दो युवा ऐसे हैं, जो कि गैर आईआईटीयन हैं।
बीटेक से ज्यादा एमबीए में थी रुचि
आईआईटी रुड़की में केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र निश्चय बुद्धिराजा ने कैट में सर्वाधिक 100 परसेंटाइल हासिल की है। मूल रूप से दिल्ली निवासी निश्चय ने बताया कि वह भले ही आईआईटी आ गए हों, लेकिन उनकी रुचि एमबीए के लिए आईआईएम जाने की थी।
निश्चय के पिता नीलेश बुद्धिराजा का दिल्ली में अपना बिजनेस है, जबकि माता रंजना बुद्धिराजा गवर्नमेंट स्कूल में प्रिंसिपल हैं। निश्चय ने कॅरियर लांचर रुड़की से कैट के लिए कोचिंग की है।
इसके साथ ही वह लगातार टेस्ट भी देते रहते थे। निश्चय का कहना है कि इसके लिए आपको तैयारी दसवीं से ही शुरू कर देनी चाहिए, ताकि ग्रेजुएशन पूरा होने तक आप कैट के लेवल तक आसानी से पहुंच सकें।
अपने ही देश की कंपनी में सेवा देंगे अभय
कैट परीक्षा में 99.99 परसेंटाइल पाने वाले अभय अग्रवाल ने पंतनगर विवि से बीटेक किया है। अभय ने बताया कि वह आईआईएम से एमबीए करने के बाद अपने देश की ही किसी कंपनी में सेवाएं देना चाहते हैं। अभय के पिता सर्वेश कुमार की मोबाइल शॉप है और मां रेखा अग्रवाल गृहिणी हैं।
अभय ने पहले ही प्रयास में कामयाबी हासिल की है। अभय की पहली च्वाइस आईआईएम अहमदाबाद है। वहां से कॉल नहीं आई तो बंगलूरू और कोलकाता में प्रवेश लेना चाहेंगे।
अभय की बड़ी बहन फोर्टिस अस्पताल में जॉब करती हैं। अभय ने परीक्षा की तैयारी टाइम इंस्टीट्यूट से की। वे कहते हैं कि कैट क्रैक करने के लिए जरूरी है फोकस होकर बेसिक्स के साथ तैयारी करें। इसके लिए घंटे का निर्धारण नहीं है।
ऋषभः बचपन का सपना हुआ साकार
यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज, देहरादून से बीटेक कर रहे ऋषभ यादव ने कैट में 99.99 परसेंटाइल स्कोर किया है। ऋषभ ने बताया कि उनके पिता डॉ. तेज सिंह यादव स्वास्थ्य विभाग लखनऊ में ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। बरेली निवासी ऋषभ की माता कल्पना यादव गृहिणी हैं।
ऋषभ ने बताया कि वह दसवीं से पहले ही आईआईएम जाने का ख्वाब देखते थे। इस बीच किसी वजह से इंजीनियरिंग में आ गए, लेकिन अब उनका सपना साकार होने जा रहा है। उन्होंने टाइम देहरादून से कोचिंग की है।
ऋषभ मानते हैं कि एक साल की कोचिंग के साथ यह भी जरूरी है कि आप अंग्रेजी के समाचार पत्रों का प्रतिदिन अध्ययन करें। बेसिक्स की तैयारी स्ट्रांग करें।