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ये है छात्रों का भविष्य बिगाड़ने वाली यूनिवर्सिटी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 09 Oct 2013 09:31 AM IST
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उत्तराखंड संस्कृत विवि की गलती के कारण एक छात्र तीन साल से संघर्ष करता आ रहा है। इस प्राइवेट परीक्षार्थी को विवि ने संस्थागत यानी रेग्युलर मार्कशीट दे दी। यही नहीं दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल से भी नवाजा गया।
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छात्र ने विवि को सूचना दी तो हड़बड़ी में अस्थायी मार्कशीट जारी कर दी गई, लेकिन गलत रोल नंबर के साथ। यह गलत रोल नंबर छात्र के सपनों में बड़ी रुकावट बन गया है। छात्र तीन साल से विवि के चक्कर काट रहा है, लेकिन कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं है।
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दूसरे साल भी दोहराई गलती
नेहरू ग्राम निवासी छात्र अनिरुद्ध बहुगुणा ने 2008-09 सत्र में हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विवि से भाषा विज्ञान आचार्य के दो वर्षीय कोर्स में प्राइवेट एडमीशन लिया था।
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2009 में मिली पहले वर्ष की मार्कशीट उसे रेग्लुर छात्र बताया गया था। अनिरुद्ध की शिकायत पर विवि ने गलती सुधार का आश्वासन दिया था, लेकिन दूसरे साल की मार्कशीट में भी यही गलती दोहराई गई।
इतना ही नहीं 2010 के दीक्षांत समारोह में उसे गोल्ड मेडल दिया गया। अनिरुद्ध ने फिर शिकायत की तो गलती सुधारने की बजाए विवि ने उससे मेडल वापस लेकर खर्च के नाम पर 1500 रुपये जमा करवा लिए।
गलत रोल नंबर के साथ जारी की मार्कशीट
छात्र को दोनों साल की अस्थाई प्राइवेट मार्कशीट तो जारी की गई, लेकिन गलत रोल नंबर के साथ। इस गड़बड़ी की वजह से छात्र कहीं नौकरी के लिए भी आवेदन नहीं कर पा रहा है।
छात्र को डर है कि उस पर फर्जीवाड़े का आरोप लग सकता है। छात्र ने इस संबंध में शिक्षामंत्री से भी शिकायत की है।
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