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उत्तराखंड PCS परीक्षा में सीसैट परिवर्तन के लिए मंथन
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 22 Dec 2015 11:17 AM IST
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संघ लोक सेवा आयोग सहित तमाम प्रदेशों में पीसीएस परीक्षा के सीसैट पैटर्न को क्वालिफाइंग करने के बावजूद उत्तराखंड में कोई फैसला नहीं होने, सिलेबस से उत्तराखंड का इतिहास, भूगोल गायब होने समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा के लिए मंगलवार को सेमिनार होने जा रहा है।
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इस सेमिनार में सीएम हरीश रावत सहित प्रदेशभर के नेता, विशेषज्ञ शमिल होंगे। अमर उजाला लगातार उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की लचर कार्यप्रणाली और पीसीएस परीक्षा के पैटर्न की वजह से प्रदेश के युवाओं की सफलता के कम आंकड़ों पर समाचार प्रकाशित कर रहा है। इस क्रम में कांग्रेस के प्रदेश महासचिव आनंद रावत की पहल पर एक सेमिनार होगा।
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सेमिनार में विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व विधायक मुन्ना सिंह चौहान, पूर्व राज्य मंत्री रविंद्र जुगरान, सुरेंद्र आर्यन, उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. एमसी उप्रेती, पूर्व आईएएस डॉ. एसएस पांगती, यूकेडी नेता मनमोहन लखेड़ा, कमला पंत, सीपीआई नेता समर भंडारी के अलावा तमाम विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे।
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सेमिनार में पांच प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी। कांग्रेस नेता आनंद रावत ने बताया कि अन्य राज्यों की भांति उत्तराखंड में भी या तो सीसैट खत्म होना चाहिए या फिर इसे क्वालिफाइंग किया जाना चाहिए। सेमिनार में आने वाली संस्तुतियों के आधार पर एक रिपोर्ट सीएम हरीश रावत और राज्यपाल डॉ. केके पाल को भी सौंपी जाएगी।
इन बिंदुओं पर होगा मंथन
- उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से संचालित पीसीएस परीक्षा में उत्तराखंड के मेधावियों की सफलता का ग्राफ बेहद कम क्यों है?
- उत्तराखंड का इतिहास, भूगोल, सामाजिक आंदोलन, राज्य आंदोलन, परंपरागत लोक नृत्य, व्यंजन, गीत-संगीत और खेल आदि विषय स्कूली पाठ्यक्रम में क्यों नहीं?
- आपदा प्रबंधन और पर्यावरण विषय स्कूली पाठ्यक्रम में क्यों नहीं?
- कुमाऊंनी, गढ़वाली, जौनसारी, पंजाबी और गंगा-जमुनी संस्कृति स्कूली पाठ्यक्रम में क्यों नहीं?
- उत्तराखंड विषय केवल एमए में पढ़ाया जाता है, बीए में क्यों नहीं?