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कुमाऊं विवि में पढ़ाया जाएगा उत्तराखंड का इतिहास

Tue, 22 Dec 2015 01:21 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल Updated Tue, 22 Dec 2015 01:21 PM IST
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uttarakhand history will teach in kumaun university.

कुमाऊं विश्वविद्यालय में अब स्नातक स्तर पर उत्तराखंड का इतिहास भी पढ़ाया जाएगा। इसके लिए बाकायदा पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है और विषय को पढ़ाने के लिए आठ शिक्षकों के पद सृजित किए गए हैं।

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बता दें कि अमर उजाला के साथ ही कुविवि नैनीताल के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. गिरधर सिंह नेगी इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से प्रयासरत थे। सोमवार को यहां कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी के दिशा-निर्देश पर विषय विशेषज्ञों की मौजूदगी में उत्तराखंड का इतिहास पाठ्यक्रम समिति की बैठक हुई,
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जिसमें उत्तराखंड का इतिहास स्नातक स्तर से ही पढ़ाने और इसके लिए तैयार किए गए पाठ्यक्रम को मंजूरी दे दी गई। इसे पढ़ाने के लिए एक प्रोफेसर, 2 एसोसिएट प्रोफेसर, 4 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद सृजित किए गए हैं।
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बैठक में तय किया गया कि पीजी स्तर पर भी एक विशिष्ट शाखा के रूप में उत्तराखंड का इतिहास पाठ्यक्रम में शामिल होगा। समिति ने प्रसिद्ध इतिहासकार एवं पद्मश्री प्रो. शेखर पाठक और प्रो.अजय सिंह रावत के सम्मान में व्याख्यानमाला आयोजित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी।

साथ ही छात्रों और शोध छात्रों के लिए ग्रीष्मकालीन शैक्षणिक भ्रमण पर्वतीय क्षेत्रों में तथा शीतकालीन भ्रमण मैदानी क्षेत्रों में आयोजित करने के लिए दो लाख रुपये के अनुदान की संस्तुति की गई। इसके अलावा, इतिहास विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डा. हीरा सिंह भाकुनी के शोध निर्देशन में छात्रों की संख्या आठ करने तथा सेवानिवृत्ति के बाद पांच साल का सेवा विस्तार (अन्य प्राध्यापकों की तरह) किए जाने की भी संस्तुति की गई।

सहायक क्यूरेटर और वर्गीकरण सहायक को शोध कराने और शोध छात्र प्रदान करने की अनुमति को भी समिति ने मंजूरी दी। हिमालय संग्रहालय के संरक्षण और संवर्धन, संग्रहालय में प्रदर्शित सामग्री के वृत्तचित्र बनाने के लिए पांच लाख रुपए की संस्तुति दी गई। इसके साथ ही जनजातीय अध्ययन केंद्र की स्थापना के मुद्दे को लेकर भी चर्चा की गई।

समिति के संयोजक और इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. गिरधर सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में विषय विशेषज्ञ के रूप में चौधरी चरणसिंह विवि मेरठ के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो.के के शर्मा, एमजेपी रूहेलखंड के प्राचार्य प्रो. अभय प्रताप सिंह, एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के प्रो. संतन सिंह नेगी, बाजपुर के डा. एके जोशी, हल्द्वानी के डा. सेराज मोहम्मद और डा. नीरज रूबाली, दोषापानी के डा. संतोष कुमार, रुद्रपुर के डा. एमएस मनोला, डा. संजय घिल्डियाल, डा. सावित्री कैड़ा जंतवाल, डा. हीरा भाकुनी, डा. रितेश साह, डा. भुवन शर्मा, डा. पूरन अधिकारी, डा. भुवन आर्य, डा. निर्मल बसेड़ा, खुशवंत सिंह व शिवराज आदि मौजूद थे।


इस संबंध में मैं कुमाऊं और गढ़वाल यूनिवर्सिटी के वीसी से मिला था। इसके बाद कुमाऊं विवि में स्नातक में उत्तराखंड का इतिहास विषय को मंजूरी मिल गई है। अब हम चाहते हैं कि पर्यटन और आपदा प्रबंधन को भी विषय के तौर पर शामिल किया जाए। इस संबंध में देहरादून में गोष्ठी बुलाई गई है।
- आनंद रावत, महासचिव, पीसीसी

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