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फलक की ऊंचाई छू रहीं उत्तराखंड की बहू, बेटियां

Thu, 26 Jun 2014 04:26 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 26 Jun 2014 04:26 PM IST
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uttarakhand girl set example

कंपनी सेक्रेटरी फाउंडेशन कोर्स के रिजल्ट में स्टेट लेवल पर पहले और दूसरे नंबर पर काबिज अमृता शाह और अक्षिता शाह ने दोस्ती की मिसाल भी कायम की है।

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आठ साल पुरानी दोस्ती

दोनों की दोस्ती आठ साल पुरानी है। हाईस्कूल, इंटर संग करने के बाद अब दोनों का सपना एक साथ कंपनी सेक्रेटरी बन मुकाम हासिल करने का है।

अमृता और अक्षिता ने वर्ष 2006 में सेंट मेरीज कान्वेंट नैनीताल में कक्षा छह में दाखिला लिया था। अमृता डे स्कॉलर रही, जबकि अक्षिता हॉस्टल में रहती थी।

दोनों की दोस्ती ऐसी हुई कि 12वीं करने के बाद देहरादून में सीएस की कोचिंग करने आ गई। दोनों ने एक ही संस्थान इंस्टीट्यूट आफ कारपोरेट स्टडीज में दाखिला लिया।
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अब कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने सीएस का फाउंडेशन कोर्स पास भी कर लिया है। खास बात यह है कि यहां भी दोनों शीर्ष 25 में हैं। अमृता के पिता भुवनलाल शाह सिंचाई विभाग में तैनात हैं, जबकि मां रेखा शाह गृहिणी हैं।
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अमृता माता-पिता की इकलौती संतान हैं। अक्षिता के पिता ताराचंद्र शाह का क्लोथ मर्चेंट का बिजनेस है, जबकि मां कविता शाह गृहिणी हैं। उनका एक छोटा भाई भी है। दोनों सहेलियों का मकसद कारपोरेट गवर्नेंस में अच्छी पोजीशन हासिल करना है।

कंपनी का कानून पसंद है

दून के निरंजनपुर निवासी अरुणिमा भटेजा ने 312 अंकों के साथ आल इंडिया 21वीं रैंक हासिल की है। राजा राम मोहन राय एकेडमी से 12वीं करने के बाद करीब सालभर अरुणिमा ने सीएस की तैयारी की।

उन्होंने बताया कि उनका हमेशा से ही कंपनियों के कानून जानने में इंटरेस्ट रहा है, इसलिए वह सीएस बनना चाहती हैं। अरुणिमा के पिता सुभाष भटेजा डिपार्टमेंटल स्टोर चलाते हैं जबकि मां शालू भटेजा गृहिणी हैं।

यह है जॉब प्रोफाइल

कंपनी सेक्रेटरी का कोर्स तीन चरणों में पूरा होता है। प्रथम चरण फाउंडेशन कोर्स का होता है। इसके बाद एग्जीक्यूटिव कोर्स और फिर प्रोफेशनल कोर्स आते हैं। तीनों चरणों को पार करने के लिए युवाओं को कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ता है।

इसके बाद कारपोरेट सेक्टर में यह युवा कंप्लायंस ऑफिसर बनते हैं। इनकी जिम्मेदारी कंपनी की लीगल रिस्पांसिबिलिटी है।

यानी देश-दुनिया से आने वाली कानूनी पेचीदगियों को इन्हें हल करना होता है। सीएस की परीक्षा को एलएलबी जैसी कठिन परीक्षा माना जाता है।

..नैनीताल की बहू ने छुआ देश का शिखर
नैनीताल स्थित सरोवर नगरी की बहू तुसी अनित साह ने दुर्गम कंचनजंघा की चोटी फतह कर कीर्तिमान रचा है। इस चोटी पर पहुंचने वाली वह देश की पहली महिला हैं।

बीती 18 मई को उत्कृष्ट महिला माउंटेनियर के रूप में देश में कीर्तिमान बनाने वाली तुसी के साथ इस अभियान में देश-विदेश के 29 पर्वतारोहियों ने भाग लिया।

इनमें से 11 कंचनजंघा चोटी (ऊंचाई 8586 मीटर) पहुंचे, जिनमें तुसी के अलावा चार विदेशी महिलाएं भी शामिल रहीं।

बड़ा बाजार स्थित आवास पर हुई मुलाकात में तुसी ने बताया कि 1983 में दमदम, कोलकाता में अंडे की दुकान चलाने वाले सामान्य परिवार में जेबी दास और शोभिता के घर जन्मी तुसी के पिता का निधन तब हो गया जब वह महज 9 वर्ष की थीं।

यह चोटियां की फतह
मां ने उन्हें जीवन में कुछ कर गुजरने का जज्बा दिया। स्कूल में एनसीसी में उन्हें पहाड़ चढ़ने की ललक जागी। जिसके बाद उन्होंने थलाई सागर, मैंथोसा, कान्याते, सीतीधार, द्रोपदी का डंडा, नंदाखाट, स्टाक कांगड़ी समेत कई चोटियां फतह कीं।



बीते वर्ष 19 मई को तुसी ने एवरेस्ट पर फतह की। उनका विवाह नैनीताल निवासी पर्वतारोही अनित साह के साथ हुआ। अनित की प्रेरणा के बाद तुसी ने देश में कीर्तिमान स्थापित करने के उद्देश्य से कंचनजंघा अभियान का संकल्प लिया।

9 अप्रैल 2014 को शुरू किए गए अभियान के बाद 18 मई को कंचनजंघा के शीर्ष पर तिरंगा लहराकर उन्होंने कीर्तिमान बनाया।

30 वर्षीय तुसी का कहना है कि अब विश्व की 14 ऊंची चोटियों पर फतह करना उनके जीवन का लक्ष्य है। मल्लीताल एलाइड स्टोर के मालिक उमेश साह और ऊषा साह की बहू के कीर्तिमान से उनके घर में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

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