उत्तराखंड बोर्ड में किसान के बेटे ने मार लिया मैदान
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ऋषिकेश के भल्लाफार्म, श्यामपुर के किसान के बेटे अभिनव रावत ने उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में उत्तराखंड टॉप कर तीर्थनगरी का गौरव बढ़ाया है।
राजकीय रीता इंटर कॉलेज, गढ़ी श्यामपुर के छात्र ने बोर्ड परीक्षा में 92.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। वह इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाना चाहता है।
अभिनव की ख्वाहिश डीआरडीओ में इंजीनियर बनकर रक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भविष्य संवारने की है। उसकी सफलता से परिजन, रिश्तेदार और स्थानीय लोग खुश हैं और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
अभिनव के पिता प्रीतम सिंह रावत गढ़ी श्यामपुर में खेती किसानी करके अपने परिवार का भरण-पालन करते हैं, जबकि मां सुमेरा देवी गृहणी हैं।
माता-पिता की इकलौती संतान अभिनव पढ़ाई के साथ ही पिता के साथ खेतीबाड़ी और गौशाला में भी हाथ बंटाता है। अभिनव इस बार एनडीए की परीक्षा भी दी है।
अभिनव ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, चाचा देवेंद्र सिंह रावत, नरेंद्र सिंह रावत और शिक्षकों का दिया है।
विषम हालात में खुद को किया साबित
देहरादून के फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कालेज की छात्रा नीलम ने 86 प्रतिशत अंक हासिल कर मेरिट लिस्ट में 21वां स्थान हासिल किया है।
विपरीत हालात के बावजूद इस उपलब्धि से नीलम ने अपने माता-पिता का सिर ऊंचा कर दिया है। वह भविष्य में इंजीनियर बनना चाहती है।
मोहनपुर प्रेमनगर निवासी नीलम के पिता मदन सिंह बल्लूपुर स्थित भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम में गार्ड हैं। मां रेनू देवी अशिक्षित हैं।
मां तो बस यही चाहती थी कि बेटी बस पास हो जाए। लेकिन नीलम सिर्फ पास नहीं हुई, बल्कि इंटर की मेरिट लिस्ट में 21वां स्थान हासिल किया है।
हालांकि, मां को बेटी की इस कामयाबी के मायने नहीं मालूम लेकिन यह जरूर समझती हैं कि नीलम ने बड़ा काम किया है। पिता मदन सिंह कहते हैं कि कड़ी मेहनत कर वह बेटी को पढ़ा रहे हैं, जिसका फल नीलम ने आज दिया है।
नीलम ने बताया कि उसने तीन से चार घंटे नियमित रूप से पढ़ाई की। घर के पास के स्कूलों में विज्ञान विषय न होने पर उसे पांच किलोमीटर दूर नारी शिल्प मंदिर इंटर कालेज में दाखिला लेना पड़ा।
नीलम ने इंग्लिश में 90, हिंदी में 85, गणित में 92, भौतिक विज्ञान में 88, रसायन विज्ञान में 75 अंक प्राप्त किए हैं।
उसने आपदा को हरा दिया
उसने भी आपदा का कहर देखा। गांव के कई खेत उफनाई नदी में समा गए थे। रास्ते, पुल सब तबाह हो चुके थे।
वो स्कूल भी ढह गया, जहां वह पढ़ने जाता था। तीन माह तक वह स्कूल की राह नहीं पकड़ सका। लेकिन सब कुछ छीन ले जाने वाली आपदा उसके हौसले को डिगा नहीं सकी।
इंटरमीडिएट की मेरिट लिस्ट में चौथे स्थान पर शुमार अगस्त्यमुनि के अनुराग चमोला ने आपदा को हरा दिया।
मूलत: अगस्त्यमुनि के वसुकेदार निवासी अनुराग चमोला और उनका छोटा भाई अनुपम चमोला सरस्वती विद्या मंदिर अगस्त्यमुनि में क्रमश: 12वीं, 10वीं के छात्र थे।
गत वर्ष 16-17 जून को आई आपदा में उनका स्कूल ढह गया। गांव में भी खासा नुकसान हुआ। रास्ते बंद होने से तीन महीने तक दोनों बच्चे स्कूल नहीं जा सके। लेकिन उनकी पढ़ने की ललक खत्म नहीं हुई थी।
अपने चारों ओर आपदा के निशान देखने के बावजूद उनमें यह उम्मीद कायम थी कि वे फिर स्कूल जाएंगे।
आखिर राजकीय इंटर कालेज भेटधार टिहरी गढ़वाल में शिक्षक पिता मनोज चमोला पत्नी ऊषा और दोनों बच्चों को लेकर दून आ गए।
यहां नेहरू कालोनी में किराये पर कमरा लिया और अनुराग, अनुपम को धर्मपुर के सुमननगर स्थित श्री गोवर्धन सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में दाखिला दिला दिया।
अनुराग बताते हैं कि पहले गणित कठिन लगती थी, लेकिन लगातार अभ्यास के बाद इसमें सबसे ज्यादा 98 नंबर हासिल किए हैं।
भौतिक विज्ञान में अनुराग के 93, जबकि रसायन विज्ञान में 91 अंक हैं। अनुराग ने कुल 91 प्रतिशत अंक हासिल कर इंटर की मेरिट में चौथा स्थान हासिल किया है। छोटा भाई अनुपम भी पीछे नहीं। उसने दसवीं में 84 फीसदी अंक हासिल किए हैं।
विजय लक्ष्मी बनना चाहती एयरोनॉटिकल इंजीनियर
उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में प्रदेश टॉपर पुष्पा प्रियंका सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नानकमत्ता की छात्रा विजय लक्ष्मी गोस्वामी एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनना चाहती है।
विजय लक्ष्मी की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के लोगों और स्कूल प्रबंधन ने उसे बधाई दी है। नगर के सूर्या इलेक्ट्रॉनिक्स के स्वामी पूरन नाथ गोस्वामी की पुत्री विजय लक्ष्मी ने 500 में से 478 अंक हासिल किए हैं।
उसे में 100 में से 100, विज्ञान में 100 में से 99 और सामाजिक विज्ञान में 97 अंक मिले हैं। विजय लक्ष्मी एकाग्रता और छह से आठ घंटे नियमित पढ़ाई को अपनी सफलता का कारण बताती हैं।
साथ ही इस सफलता का श्रेय वह परिजनों, माता-पिता और गुरुजनों को देती हैं। उसका सपना बड़ी बहन ज्योति गोस्वामी की तरह मेरिट सूची में जगह बनाने का था जो पूरा हो गया।
विजय लक्ष्मी ने बताया कि उसके दादा सेवानिवृत्त सूबेदार धननाथ गोस्वामी हैं। मां आशा गोस्वामी गृहणी और पिता बिजनेसमैन हैं।
विजय लक्ष्मी पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानती हैं।