UK बोर्ड के होनहारों ने सबको पछाड़ कर रचा इतिहास
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12वीं के बाद ग्रेजुएशन में शुरू हुए मेरिट से दाखिलों में पहली बार उत्तराखंड बोर्ड के छात्र आगे निकल गए। देहरादून के सभी कॉलेजों में मेरिट में चयनित छात्रों में 60 प्रतिशत से ऊपर छात्र यूके बोर्ड के हैं।
बीते वर्ष तक यूके बोर्ड के छात्र हार्ड मार्किंग की वजह से दाखिलों की दौड़ में पिछड़ जाते थे। इस बार सीबीएसई और आईएससी बोर्ड के छात्र पीछे रह गए। शहर के एसजीआरआर पीजी कॉलेज में बीए, बीएससी और बीकॉम की दाखिला प्रक्रिया करीब समाप्त हो चुकी है।
कॉलेज में पहली मेरिट आने के बाद यूके बोर्ड के छात्र सबसे आगे नजर आए। यहां पहली मेरिट में करीब 65 प्रतिशत छात्र यूके बोर्ड के रहे। इसी प्रकार, डीबीएस पीजी कॉलेज की मेरिट में भी यूके बोर्ड के छात्रों का प्रतिशत इस साल 60 से ऊपर रहा। डीएवी कॉलेज में मेरिट जारी हो चुकी है।
यहां भी यूके बोर्ड के छात्रों की भरमार है। गत वर्ष तक ये छात्र मेरिट में फिसड्डी होते थे। इनके मुकाबले इस साल सीबीएसई और आईएससी बोर्ड के छात्र दाखिलों में पिछड़ गए। डीबीएस कॉलेज के प्राचार्य ओपी कुलश्रेष्ठ और डीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन ने पहली बार यूके बोर्ड के छात्रों के मेरिट से दाखिलों की दौड़ में आगे रहने की पुष्टि की है।
इसलिए आगे निकले उत्तराखंड बोर्ड के छात्र
गत वर्ष तक यूके बोर्ड में हार्ड मार्किंग होती थी और छात्र 12वीं में औसतन 55 से 65 प्रतिशत तक स्कोर कर पाते थे। इस साल स्टेट बोर्ड में जबरदस्त अंक वर्षा हुई। पहली बार 12वीं और 10वीं में हाई स्कोर बना।
12वीं के अंकों का औसत भी बढ़कर 70 से 80 के बीच आ गया। राज्य के कॉलेजों में मेरिट से दाखिले के वक्त स्टेट बोर्ड के छात्रों को 10 प्रतिशत का अधिभार मिलता है। यानी जिस छात्र ने 12वीं में 80 प्रतिशत अंक पाए होंगे, वह सीधे 90 प्रतिशत काउंट किया जाएगा। सीबीएसई और आईएससी बोर्ड के छात्रों को यह लाभ नहीं मिलता है।
इंस्पायर अवार्ड का प्रतिशत भी बढ़ा
12वीं करने के बाद विज्ञान में आगे की पढ़ाई के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से इंस्पायर स्कॉलरशिप दी जाती है। इसके लिए हर बोर्ड के टॉपर्स के हिसाब से एक निश्चित प्रतिशत तय किया जाता है।
गत वर्ष 12वीं विज्ञान में 72 प्रतिशत तक अंक वाले छात्रों को 80 हजार रुपए प्रति वर्ष की इंस्पायर स्कॉलरशिप दी गई थी लेकिन इस साल अंक वर्षा के चलते यह क्राइटेरिया बढ़कर 80 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
इस बार ज्यादा खुली मार्किंग होने से यूके बोर्ड के छात्र पहली बार मेरिट से दाखिलों में आगे निकल गए। गत वर्ष तक अधिभार होने के बावजूद उन्हें दाखिले में परेशानी आती थी।
- प्रो. वीए बौड़ाई, प्राचार्य, एसजीआरआर पीजी कॉलेज