अब कंप्यूटर साइंस के साथ पढ़ सकेंगे मैकेनिकल इंजीनियरिंग
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उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) से संबद्ध 850 इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू होगा। कुलपति प्रो. आरके खांडल ने नए सत्र से इसे लागू करने के लिए कमेटी गठित कर दी है।
इससे इंजीनियरिंग की एक ब्रांच के स्टूडेंट दूसरी ब्रांच का कोर्स आसानी से पढ़ सकेंगे। अगर स्टूडेंट सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है तो वह आसानी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग या फिर इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी कर सकेगा।
क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा भी होगी, यानी कोर्स के अलावा जिस दूसरे कोर्स का निर्धारित पाठ्यक्रम जितने भी क्रेडिट का पढ़ा होगा, वह उसके मूल कोर्स के क्रेडिट में जोड़ दिए जाएंगे।
यूपीटीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. बीएन मिश्रा ने बताया कि कुलपति की ओर से गठित कमेटी में इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के निदेशक प्रो. एएस विद्यार्थी, केएनआईटी, सुल्तानपुर के निदेशक प्रो. रघुराज सिंह सहित चार सदस्य शामिल हैं।
स्टूडेंट्स को मिलेगी डिस्प्रिलनरी नॉलेज
कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि सभी कॉलेजों में किस प्रारूप में यह सिस्टम लागू किया जाना है। अगली एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इसे स्वीकृत कराया जाएगा और अगले सत्र से इसे लागू कर दिया जाएगा।
प्रो. बीएन मिश्रा ने बताया कि चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम से स्टूडेंट्स को मल्टी डिस्प्रिलनरी नॉलेज मिलेगी। बीटेक कम्प्यूटर साइंस का स्टूडेंट आसानी से बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर सकेगा। क्रेडिट ट्रांसफर से स्टूडेंट्स अपने कोर्स के अलावा दूसरे किसी भी अन्य कोर्स के जितने भी क्रेडिट हासिल करेंगे, वे उनके मूल कोर्स के क्रेडिट में जुड़ जाएंगे। कमेटी को अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नए सत्र से इसे लागू किया जा सके।
उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में 1257 अभ्यर्थी शामिल हुए। पीएचडी प्रवेश परीक्षा के को-ऑर्डिनेटर प्रो. जेपी सैनी ने बताया कि एंट्रेंस एग्जाम दो केंद्रों पर हुआ। इसी सप्ताह रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर यह अपलोड होगा।