इस तरह से पता चलेगा कौनसा इंजीनियरिंग कॉलेज है सबसे अच्छा
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शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए यूपीटीयू अब कॉलेजों की ग्रेडिंग करेगा। ग्रेडिंग के लिए फिलहाल 18 बिंदुओं पर सहमति बनी है। यह फैसला रविवार को यूपीटीयू में कुलपति प्रो. विनय पाठक की अध्यक्षता में सभी डीन और कॉलेजेज के डायरेक्टर के साथ हुई बैठक में किया गया। बैठक में इसके साथ अलावा कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रो. आरके सिंह ने बताया कि एकेडमिक सुधार के लिए कुलपति की पहल पर हुई बैठक में तय किया गया कि सभी कॉलेजों की इंफ्रास्ट्रकचर, लैब, लाइब्रेरी, रिजल्ट, स्पोर्ट्स व कल्चर एक्टिविटी, प्लेसमेंट जैसे बिंदु पर ग्रेडिंग की जाएगी। यह ग्रेडिंग हर साल होगी।
जिस बिंदु में गिरावट या बढ़ोतरी होगी उसे अपडेट कर दिया जाएगा। इससे स्टूडेंट्स को अपनी पसंद का कॉलेज तलाशने में मदद मिलेगी। कॉलेज भी ग्रेडिंग सुधारने के लिए बेहतर करने के लिए प्रेरित होंगे।
विवि की गतिविधियों में कॉलेजों की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्हें स्पोर्ट्स और कल्चरल मीट जैसे आयोजनों की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया गया है। इस साल कल्चरल मीट की जिम्मेदारी एसआर कॉलेज को सौंपने पर सहमति बनी है। अन्य कॉलेजों को विभिन्न जिम्मेदारियां दी गई हैं।
तैयार किया जाएगा क्वेश्चन बैंक
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि स्टूडेंट्स की मदद के लिए क्वेश्चन बैंक तैयार किया जाए जो विवि की वेबसाइट पर मौजूद होगा। क्वेश्चन बैंक के साथ ही वेबसाइट पर उनके उत्तर भी दिए जाएंगे। इससे स्टूडेंट्स को यह पता चल सकेगा कि किस तरह के सवाल पूछे जाएंगे और उनका उत्तर कैसे दिया जाए। इससे स्टूडेंट्स का रिजल्ट बेहतर हो सकेगा।
टॉपर्स को स्कॉलरशिप देने की तैयारी
बैठक में कुलपति प्रो. विनय पाठक ने टॉपर्स को स्कॉलरशिप देने की योजना शुरू करने की मंशा जाहिर की। उनके अनुसार आरक्षित वर्ग के स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप का लाभ मिलता है। लेकिन सामान्य श्रेणी के कई स्टूडेंट्स को अच्छा करने के बावजूद स्कॉलरशिप नहीं मिलती। इसलिए वर्ग का भेद किए बगैर टॉपर्स को स्कॉलरशिप दी जाए। इस पर बाकी सदस्यों ने सहमति जाहिर की। स्टूडेंट्स वेलफेयर की स्कीम को और बेहतर करने पर विचार-विमर्श किया गया।
प्लेगरिज्म रोकने के लिए खरीदा जाएगा सॉफ्टवेयर
यूपीटीयू प्लेगरिज्म रोकने के लिए जल्द ही सॉफ्टवेयर खरीदेगा। पीएचडी और एमटेक जैसे पाठ्यक्रमों में प्लेगरिज्म (साहित्यिक चोरी) के काफी मामले आते हैं। मैनुअली इन पर रोक लगाना काफी मुश्किल होगा। इसलिए इसे रोकने को सॉफ्टवेयर खरीदा जाएगा। इसके बाद प्रोजेक्ट आदि सबमिट करने में अगर किसी ने प्लेगरिज्म किया तो सॉफ्टवेयर उसे तुरंत पकड़ लेगा।
यूपीटीयू में कैंपस प्लेसमेंट का स्तर सुधारने के लिए एजेंसी की मदद लेने की तैयारी की जा रही है। इस पर सैद्धांतिक सहमति भी बन चुकी है। जल्द ही यूपीटीयू में प्लेसमेंट की कमान निजी एजेंसी के हाथों में होगी। असल में यूपीटीयू के कॉलेजों में पढ़ाई के बाद रोजगार न मिलने की वजह से एडमिशन का ग्राफ लगातार नीचे गिरता जा रहा है। इसलिए प्लेसमेंट की दशा सुधारने के लिए प्रयास किया जा रहा है।