यूपीटीयू के 650 कॉलेजों की संबद्धता पर संकट

आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 08 May 2014 04:40 AM IST
विज्ञापन
uptu faces problem

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
यूपीटीयू से संबद्घ 650 इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों की संबद्घता का मामला फँस गया है।
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 15 मई तक कॉलेजों को संबद्घता दी जानी है लेकिन अभी तक संबद्घता कमेटी की बैठक में कोई निर्णय ही नहीं हो पा रहा है।
उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) से संबद्घ 650 इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों की संबद्घता फंस गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 15 मई तक कॉलेजों को संबद्घता दी जानी है।

लेकिन अभी तक संबद्घता कमेटी की बैठक में इस पर कोई निर्णय ही नहीं हो पा रहा है।

जबकि नियमानुसार छह महीने पहले इन कॉलेजों की जांच के लिए एक पैनल बनाया जाना चाहिए था जो कि कॉलेजों की जांच करता और कमियां बताता।

फिर इन कमियों को पूरी करने की शर्त पर इन्हें आगे तीन वर्षों के लिए संबद्घता दे दी जाती। मगर ऐसा नहीं हुआ।

सिर्फ एक महीने पहले एप्रूवल फॉर्म भरवाया गया और उसके बाद बिना जांच करवाए ही संबद्घता कमेटी के सामने इसे रख दिया गया है।

बीते दिनों हुई संबद्घता कमेटी की बैठक में कोई निर्णय नहीं लिया जा सके। इसमें कॉलेजों की संबद्घता के लिए बनायी गई कमेटी में शासन का एक अधिकारी होना अनिवार्य है।

मगर वह संबद्घता कमेटी की बैठक में उपस्थित नहीं हो रहा।

शासन के अधिकारी की मौजूदगी के बगैर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा। फिलहाल यूनिवर्सिटी में संबद्घता का यह मामला पेंचीदा हो गया है।

अब आठ दिन शेष बचे हैं और इस मुद्दे पर कोई निर्णय न हुआ तो फिर कॉलेजों की संबद्घता लटक जाएगी।

मालूम हो कि बीते शैक्षिक सत्र में 44 कॉलेजों को इसलिए संबद्घता नहीं दी गई थी क्योंकि वह संबद्घता के लिए निर्धारित 15 मई तक अपनी औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पाए थे।

इसके कारण बीटेक के 4500 स्टूडेंट्स को फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा देने के बाद आगे दाखिला देने से रोक दिया गया है।

फिलहाल जिस तरह इनका एप्रूवल फॉर्म भरवाया गया और संबद्घता के लिए जांच करने अभी तक कोई पैनल न जाने के कारण इनकी संबद्घता भी फंस सकती है।

फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन के अधिकारी भी इस मुद्दे पर अभी कुछ साफ-साफ कहने से बोल रहे हैं।

कुलपति डॉ. आरके खांडल कोशिश में जुटे हुए हैं कि नियमानुसार ही कार्रवाई की जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us