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सीटें भरने के लिए यूपीटीयू ने अपनाया नया फंडा

Tue, 26 Nov 2013 10:45 AM IST
आशीष कुमार त्रिवेदी/लखनऊ
आशीष कुमार त्रिवेदी/लखनऊ Updated Tue, 26 Nov 2013 10:45 AM IST
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uptu new programme for seat filling

उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) ने इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों की सीटें भरने के लिए नया नुस्खा निकाला है।

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अब इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेज सीनियर सेकेंड्री स्कूल व इंटरमीडिएट कॉलेजों के साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स को लुभाएंगे, ताकि वह उनके यहां दाखिला लें।

सभी इंजीनियरिंग कॉलेज छात्रों को अपने यहां दी जा रही सुविधाओं और खासियत के बारे में जानकारी देंगे और उन्हें इंजीनियरिंग में दाखिला लेने के लिए प्रेरित करेंगे।
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एक्सपर्ट फैकल्टी मार्गदर्शन भी देगी, ताकि दूसरे राज्यों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने यूपी से बड़ी संख्या में जा रहे स्टूडेंट्स को यहीं पर रोका जा सके।

इंस्पायर प्रोग्राम के जरिए रिश्तों की कड़ी मजबूत करने का काम किया जाएगा। डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) इस प्रोग्राम के लिए फंड भी देता है।

यूपीटीयू प्रशासन ने सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों को निर्देश दिए कि वह इस तरह के प्रोग्राम को आयोजित करें।

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इससे दो फायदे होंगे, पहला यह कि इंटरमीडिएट तक साइंस की पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट आगे भी इस स्ट्रीम में पढ़ने के लिए प्रेरित होंगे और दूसरा यह कि इंजीनियरिंग कॉलेजों को अच्छे स्टूडेंट मिल सकेंगे।

इंस्पायर प्रोग्राम में इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेज एक्सपर्ट फैकल्टी बुलाएंगे और छात्रों का मार्गदर्शन किया जाएगा।

दरअसल, इस पूरी कवायद का फायदा यह होगा कि इंजीनियरिंग कॉलेजों की अभी जो छवि स्टूडेंट्स के सामने बनी है, वह उसे सुधार सकेंगे।

अभी तो कॉलेजों में सीटें भरना मुश्किल
इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित हुई राज्य प्रवेश परीक्षा (एसईई) 2013-14 में कुल 1.92 लाख स्टूडेंट्स ने आवेदन किया था और 1.34 लाख सीटों के मुकाबले महज 54 हजार सीटें ही भर पाईं थीं।

तमाम इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे भी हैं, जिनके यहां कुछ कोर्सों में एक भी सीटें नहीं भरी। यूपीटीयू के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंजीनियरिंग कॉलेजों की सीटें भरना ही है।

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