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यूपीटीयू के 4,500 स्टूडेंट्स का रिजल्ट अटका
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 10 Apr 2014 02:33 PM IST
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उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) से संबद्ध 44 इंजीनियरिंग कॉलेजों के 4,500 स्टूडेंट्स को कार्यपरिषद ने कोई राहत नहीं दी है। बैठक में इन स्टूडेंट्स का प्रोविजनल रिजल्ट निकालने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।
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कुलपति डॉ. आरके खांडल के सामने रजिस्ट्रार ने दलील दी कि इन स्टूडेंट्स पर कार्यपरिषद अपने स्तर पर कोई फैसला कर ले और आगे कोर्ट से निर्णय आने पर इस अस्थायी निर्णय को कोर्ट के निर्देशानुसार बदल दिया जाएगा।
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इस मामले में कुलपति ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए इन स्टूडेंट्स को किसी भी तरह की राहत देने से इन्कार कर दिया।
मालूम हो कि इन इंजीनियरिंग कॉलेजों ने मान्यता के लिए निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद आवेदन किया था और अपने यहां बीटेक फर्स्ट सेमेस्टर में करीब 4,500 स्टूडेंट्स को दाखिला दे दिया था।
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इसके बाद यह फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद यूपीटीयू प्रशासन ने इन स्टूडेंट्स को परीक्षा में बैठने से रोक दिया। कुछ इंजीनियरिंग कॉलेज कोर्ट की शरण में पहुंचे तो यूपीटीयू ने इन स्टूडेंट्स को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी।
लेकिन बीटेक फर्स्ट सेमेस्टर का रिजल्ट करीब महीने भर तक इस ऊहापोह में रुका रहा कि इस पर कोई निर्णय कोर्ट से आ जाए तो रिजल्ट घोषित कर दिया जाए।
बीते दिनों यूपीटीयू ने इन 4,500 स्टूडेंट्स का रिजल्ट रोककर बाकी सभी 1.20 लाख स्टूडेंट्स का रिजल्ट घोषित कर दिया है।
कार्यपरिषद की बैठक में कहा गया कि कॉलेजों ने निर्धारित समय सीमा के बाद संबद्धता का प्रस्ताव दिया तो आखिर उसे बगैर कोर्ट का फैसला आए ही हम अपने स्तर पर राहत क्यों दें?
सभी ने कुलपति डॉ. आरके खांडल के रुख को सही करार देते हुए इन स्टूडेंट्स का रिजल्ट न घोषित करने पर सहमति जताई।
कुलपति डॉ. आरके खांडल का कहना है कि वे हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 15 मई के बाद संबद्धता के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता, जबकि इन कॉलेजों ने आवेदन 15 मई के बाद किया।
अब इस मसले पर कानूनी राय लेकर एक एक्सपर्ट टीम लगाई जाएगी। कुलपति ने वकीलों के पैनल को भी बदलने की बात कही है, ताकि यूपीटीयू अपने पक्ष को ढंग से रख सके।
यूजीसी ने नए कॉलेजों की संबद्धता पर रोक लगा दी है। ऐसे में इस वर्ष भी इन कॉलेजों को संबद्धता नहीं मिल सकती। अगर हाईकोर्ट इन स्टूडेंट्स को पढ़ाई जारी करने की राहत देता है तो इन्हें दूसरे कॉलेज में ट्रांसफर करने पर विचार होगा।
सब कुछ कोर्ट के आदेश पर ही निर्भर होगा। फिलहाल, स्टूडेंट्स को कोई राहत नहीं मिलेगी। सूत्रों की मानें तो कार्यपरिषद की बैठक में इस मामले पर रजिस्ट्रार के बार-बार टिप्पणी करने पर उन्हें टोका भी गया।
कई सदस्यों ने आपत्ति जताई कि रजिस्ट्रार का काम सिर्फ मिनिट्स तैयार करना है न कि इस मामले में बहस करने का है। इधर, कर्मचारियों के मुद्दे पर कोई निर्णय आचार संहिता के चलते नहीं हो पाया।
अभी कर्मचारियों को इस मामले में इंतजार करना होगा। इसके बाद ही कर्मचारियों को विनियमित किए जाने पर कोई अंतिम फैसला होगा।
मालूम हो कि वर्ष 2000 में जब यूपीटीयू स्थापित हुआ था तब से कार्य कर रहे करीब 109 कर्मचारियों को अभी तक निश्चित मानदेय देकर ही काम करवाया जा रहा है, अभी तक वह नियमित कर्मचारी नहीं बन पाए हैं।