आईआईटी की रिपोर्ट में यूपी के स्टूडेंट्स के बारे में आई अच्छी खबर
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यूपी के होनहारों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में शामिल इंडियन इंस्टीयूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) की 12.62 प्रतिशत सीटों पर कब्जा जमाया है। बीएचयू वाराणसी और आईएसएम धनबाद समेत 19 आईआईटी संस्थानों की 9974 सीटों में से 1259 पर यूपी के होनहार प्रवेश पाने में सफल हुए हैं।
प्रवेश संख्या के लिहाज से राजस्थान के बाद यूपी दूसरे स्थान पर रहा है। वहीं बेटियों ने भी इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 9 प्रतिशत सीटों पर कब्जा किया है। यह खुलासा जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) एडवांस्ड 2015 की काउंसलिंग पूरी होने पर आयोजक संस्थान आईआईटी मुंबई की ओर से जारी विश्लेषण रिपोर्ट से हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान से जहां सर्वाधिक 1995 विद्यार्थी चुने गए हैं। इस साल के नतीजों में खास बात यह रही कि छात्राओं ने भी करीब 900 सीटों पर सफलता हासिल की है। इनमें सर्वाधिक 138 छात्राओं ने आईआईटी मद्रास में एडमीशन लिया है। वहीं छात्रों में ज्यादा एडमीशन आईआईटी खड़गपुर में हुए हैं जिनकी संख्या 1,223 रही।
आईआईटी में पहुंचे 9974 में से 6690 की मांएं गृहणी हैं। इनमें से ज्यादातर उच्च शिक्षित भी नहीं हैं। आय वर्ग के लिहाज से भी सामान्य लोगों के बच्चों ने शानदार प्रदर्शन किया है। सालाना 8 लाख रुपये से अधिक आय वर्ग के अभिभावकों के डेढ़ हजार बच्चे आईआईटी में सफल हुए हैं।
कम पढ़े अभिभावकों के बच्चे भी सफल
वहीं एक लाख रुपये से कम आय वाले अभिभावकों के 1,600 बच्चों ने इस कठिन परीक्षा में लोहा मनवाया है। करीब 4 हजार विद्यार्थी ऐसे थे, जिनके परिवार की सालाना आय 1 से 5 लाख रुपये थी।
खुद किन्हीं मजबूरियों से ऊंची शिक्षा हासिल करने से वंचित रहे करीब 1100 अभिभावकों के बच्चे भी इस परीक्षा में सफल हुए हैं। इनमें ज्यादातर अभिभावकों की शैक्षिक योग्यता सिर्फ 10वीं पास की रही तो करीब ढाई सौ विद्यार्थियों के अभिभावक निरक्षर हैं। इसी तरह 900 विद्यार्थियों की मां निरक्षर हैं। लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को प्रेरित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
वर्ष 2014 में आईआईटी में एडमीशन पाए विद्यार्थियों में 8 प्रतिशत बेटियां थीं, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 9.03 प्रतिशत रहा। इस परीक्षा में 900 सीटों पर बेटियों ने कब्जा जमाया है।
प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में 25 प्रतिशत सीटों पर ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को प्रवेश मिला है। इनमें 888 विद्यार्थियों के अभिभावक किसान हैं, जो अन्य प्रोफेसन से जुड़े अभिभावकों के बच्चों से ज्यादा है। इसके अलावा 466 इंजीनियर, 479 शिक्षक और 232 डॉक्टर अभिभावक के बच्चे ही आईआईटी में चयनित हुए हैं।
वहीं 1,548 बच्चों के अभिभावक अन्य कारोबार से जुडे़ हैं। सरकारी सेवाओं में कार्यरत 2,989 अभिभावक ने अपने बच्चों को आईआईटी में भेजा है।