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उत्तराखंड में ही मिलेगी डीयू जैसी एजूकेशन

Sun, 19 Jan 2014 11:39 AM IST
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 19 Jan 2014 11:39 AM IST
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university syllabus will be changed soon

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के पुराने ढर्रे और पाठ्यक्रम में बदलाव लाकर नेशनल एस्समेंट एंड एक्रीडेशन काउंसिल (नेक) की ग्रेडिंग में खरा उतारने के कोशिशें शुरू हो गई हैं।

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विश्वविद्यालयों को कसौटी में कसने की तैयारी

दरअसल देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों को उनकी गुणवत्ता और पाठ्यक्रमों के आधार नेक मूल्यांकन कर ग्रेड देता है। ऐसे में उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों को भी उसी कसौटी में कसने की तैयारी है।
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इसके लिए क्या-क्या तैयारियां की जानी हैं और क्या कार्यवाही होनी है इसके लिए विशेषज्ञों से सुझाव मांगे गए हैं। हाल ही उत्तराखंड सरकार की ओर से उच्च शिक्षा नीति तैयार करने के लिए एक कमेटी गठित की गई है।
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समिति से सुझाव मांगे
कमेटी को दीर्घकाल में लिए जाने वाले निर्णयों के साथ तत्काल सुधार के लिए भी अपने सुझाव देने को कहा गया है। कमेटी जनवरी के अंत तक अपनी संस्तुति शासन को देगी।

सरकार चाहती है कि उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम दिल्ली विश्वविद्यालय की तरह ही हो। इसमें सबसे पहले स्नातक स्तर पर पाठ्यक्रमों का पुनरीक्षण किया जाना है। सेमेस्टर सिस्टम को किस तरह से रेगुलेट किया जाए इस संबंध में भी समिति से सुझाव मांगे गए हैं।

उच्च शिक्षा सचिव मनीषा पंवार का कहना है कि प्रदेश में परीक्षा संबंधी सुधार भी अत्यंत जरूरी हैं। इसके लिए कुंजी, गेस पेपर पर प्रतिबंध लगाने, स्तरीय पाठ्य पुरस्तकों और सामग्री का विवरण।

उनका कहना है कि नवीनतम तकनीकी केआधार पर विषयों केप्रश्नपत्र तैयार करने पर विचार किया जा रहा है ताकि गंभीर विद्यार्थी सिर्फ परीक्षा में पास न हो अपने विषय के संबंध्धमें सम्यक जानकारी भी रखे।

सरकार उच्च शिक्षा को रोजगारपरक भी बनाना चाहती है। जिस तरह मुक्त विश्वविद्यालय का सिडकुल के साथ एमओयू है उसी तरह विभिन्न विश्वविद्यालय व महाविद्यालय ऐसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करें जिनकी बाजार में मांग है।


प्रोफेसर व प्राध्यापकों के लिए रिफ्रेशर कोर्स
उच्च शिक्षा केकायाकल्प कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों केप्रोफेसर व प्राध्यापकों को साल में एक बार 15-20 दिन का रिफ्रेशर कोर्स कराने की भी योजना है।

ग्रीष्म अथवा शीत अवकाश केदौरान संक्षिप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार कर दून विश्वविद्यालय में इस तरह का कोर्स कराया जा सकता है।

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