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दो विवि के बीच दो साल से झूल रहे छात्र

Sat, 21 Dec 2013 05:51 PM IST
अमर उजाला, उत्तरकाशी
अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Sat, 21 Dec 2013 05:51 PM IST
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university students not get mark sheet

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय को केंद्रीय विवि का दर्जा मिलने के बाद प्राइवेट परीक्षार्थी के तौर पर एमए करने वाले छात्र-छात्राओं को दो साल से अंकपत्र नहीं मिल पा रहे हैं।

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अंकपत्र ना मिलने से उन्हें आगे की पढ़ाई और नौकरी आदि में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उच्च शिक्षा विभाग अभी तक यह भी तय नहीं कर पाया है कि इन छात्र-छात्राओं को अंकपत्र कौन जारी करेगा।
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दो विवि में अटका है मामला
गढ़वाल विवि को केंद्रीय विवि का दर्जा मिलने के बाद वर्ष 2011 में राज्य सरकार ने पं. दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय बनाया। बाद में इसका नाम बदलकर श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय कर दिया गया।
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बीते दो शैक्षिक सत्र में परास्नातक की मुख्य परीक्षा एवं बैक पेपर की परीक्षा गढ़वाल विवि ने कराई, लेकिन उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को अभी तक अंकपत्र मुहैया नहीं कराए गए हैं। दोनों विवि के अधिकारी एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।

प्राइवेट से परास्नातक करने वाले अमित ममगांई, गीता नौटियाल, अजय भंडारी, अवंतिका, अरुण भट्ट, उपासना आदि ने बताया कि प्रथम वर्ष उत्तीर्ण करने पर नेट पर अंकपत्र उपलब्ध कराए गए और इसी के आधार पर उन्हें बैक पेपर एवं द्वितीय वर्ष की परीक्षा में शामिल किया गया। लेकिन अभी तक अंकपत्र की मूल प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है।

नहीं मिल रहा नेट का प्रमाणपत्र
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय उत्तरकाशी से एमकाम करने वाले सौरभ रावत ने बताया कि उन्होंने नेट जेआरएफ की परीक्षा उत्तीर्ण की है। एमकाम की अंकतालिका न मिलने के कारण यूजीसी उन्हें प्रमाणपत्र नहीं दे रहा है। विवि के अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं।


क्या कहते हैं विवि के अधिकारी
वर्ष 2011 में जारी शासनादेश के अनुसार परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दीनदयाल विवि और बाद में श्रीदेव सुमन विवि को दी गई है। हालांकि नए बने विवि में कुछ दिक्कतों के चलते परीक्षाएं गढ़वाल विवि ने ही कराई हैं, लेकिन हमें अभी तक अंकपत्र जारी करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है। इस वजह से गढ़वाल भर के करीब 17-18 हजार छात्र-छात्राओं को अंकपत्र जारी नहीं हो पाए हैं।
-प्रो.एलजे सिंह, ओएसडी परीक्षा गढ़वाल विवि

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