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कॉमन कोर्स नहीं पढ़ाना चाहती यूनिवर्सिटीज
आशीष त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Wed, 23 Oct 2013 02:19 AM IST
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कई कोशिशों के बावजूद राजधानी के विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में एक समान पाठ्यक्रम लागू नहीं हो पा रहा है। करीब डेढ़ वर्ष पहले एक सामान पाठ्यक्रम लागू करने के लिए कमेटी बनीं।
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कमेटी ने स्नातक में करीब 150 विषयों व कोर्स में से 67 को चुना जो सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में पढ़ाए जा रहे।
इसे लेकर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के तत्कालीन कुलपति प्रो. हर्ष सहगल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी गई।
अंतिम रूप से तय हुआ कि 50 विषय व कोर्सों में एक सामान पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। लखनऊ विश्वविद्यालय ने भी अलग-अलग बोर्ड ऑफ स्ट्डीज से एक सामान पाठ्यक्रम पास करवाए लेकिन इन्हें लागू नहीं किया जा सका।
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राजधानी में खुले सभी विश्वविद्यालय अपना अलग-अलग पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के मुकाबले नए खुले विश्वविद्यालयों में जो कोर्स पढ़ाया जा रहा है वह कंपटीशन के लिहाज से अधिक मुफीद है।
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यहां इस बात का विशेष ख्याल रखा गया कि छात्र स्नातक व परास्नातक की पढ़ाई करते-करते ही कंपटीशन भी बीट कर लें। ख्वाजा मुईनुद्दीन उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी ने सिविल सर्विसेज को ध्यान में रखकर विशेषज्ञों से अपना कोर्स तैयार करवाया है।
वहीं डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी में न्यूरो इकोनॉमिक्स तक पढ़ाई जा रही है ताकि छात्र यह भी जान सकें की कोई आर्थिक निर्णय व समझौता करते समय क्या मनोदशा होती है।
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन का पूरा सिलेबस सिविल सेवा परीक्षा के कोर्स के हिसाब से तैयार किया गया है।
सिविल सेवा परीक्षा और एलाइड सर्विसेज की परीक्षा में जो कुछ पूछा जाता है उसे यहां पर विशेष तौर पर पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इसके अलावा मैनेजमेंट कोर्सेज का पूरा सिलेबस इंडस्ट्री के हिसाब से तैयार किया गया है।
फिर यहां पर ग्रेजुएशन में ही सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है ताकि छात्र पढ़ाई में लापरवाही न बरतें। यहां कोर्स डिजाइन करने वाली कमेटी के समन्वयक प्रो. सैय्यद हैदर कहते हैं कि स्टूडेंट पढ़ाई के साथ ही कंपटीशन भी बीट कर सकें इसका पूरा ध्यान रखा गया है।
वहीं उप्र विकलांग उद्धार डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी में तो इकोनॉमिक्स का कोर्स एकदम अलग है। यहां इकोनॉमिक्स व कॉमर्स का कोर्स तैयार करने के लिए देश व विदेश की नामचीन यूनिवर्सिटीज के कोर्सों का अध्ययन किया गया।
इसके बाद निर्णय लिया गया कि बीए में स्टूडेंट को न्यूरो इकोनॉमिक्स पढ़ाई जाए ताकि उन्हें यह पता चल सके कि जब कोई आर्थिक निर्णय लेते हैं तो दिमाग की मनोदशा किस तरह काम करती है।
छात्रों को सोशल इकोनॉमिक्स, एथिक्स एंड इकोनॉमिक्स और न्यू पब्लिक फाइनेंस भी पढ़ाया जाता है। इसके अलावा टैली और ई बैंकिंग का भी ज्ञान दिया जा रहा है।
इकोनामिक्स में मैथ का पार्ट यहां पर स्नातक में फर्स्ट सेमेस्टर से ही पढ़ाया जाता है। यूनवर्सिटी के डीन एकेडमिक्स प्रो. एपी तिवारी कहते हैं कि हमने कोर्स को डिजाइन करने में काफी मेहनत की है ताकि स्टूडेंट जो कुछ पढ़े वह ग्लोबल लेवल का हो।
नेशनल कॉलेज ने बदला अपना कोर्स
नेशनल पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि वर्ष 2009 में कॉलेज स्वायत्त हुआ। इसके बाद हमने अपना कोर्स बदल दिया। क्योंकि स्नातक में पढ़ाई करने वाले 60 प्रतिशत से अधिक छात्र ऐसे हैं।
जो पढ़ाई पूरी करने के बाद तुरंत कंपटीशन में बैठना चहते हैं। अगर उन्हें हम उन्हें कोर्स में ही कंपटीशन का कंटेंट पढ़ा दें तो वे रेग्युलर क्लास आएंगे।
हम छात्रों को रीजनिंग मैथ, इंग्लिश कम्युनिकेशन, मेंटल एबिलिटी, पर्सनॉलिटी डवलपमेंट, कंप्यूटर एनॉलिसिस और एनवॉयरमेंटल एजुकेशन पढ़ा रहे हैं। वह हर सेमेस्टर में अपने कोर्स के साथ-साथ इन पेपर को भी पढ़ते हैं।
इसका असर यह हुआ कि हमारे कॉलेज से बीबीए करने वाला छात्र आकाश अग्रवाल कैट में अच्छी रैंक पर आया। चार्टर्ड अकाउंटेंट में भी स्टूडेंट निकल रहे हैं। बैंकिंग सर्विसेज में हर साल काफी स्टूडेंट चयनित हो रहे हैं।
यही कारण है कि नेशनल पीजी कॉलेज में हर साल आवेदन फॉर्म की संख्या में करीब तीन हजार का इजाफा हो रहा है। स्नातक में दाखिले के लिए हर साल मुकाबला कड़ा होता जा रहा है।
डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि जो कोर्स है उसमें छात्र पीजी कर रिसर्च भी कर सकते हैं। डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि सभी विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों को छूट होनी चाहिए कि वह अपना-अपना कोर्स खुद डिजाइन करें। कंपटीशन में जो बेहतर करेगा वही आगे निकलेगा।
एलयू के कोर्स पर कॉलेज ने उठाए सवाल
केकेसी के प्राचार्य डॉ. एसडी शर्मा कहते हैं कि बीकॉम जैसे पॉपुलर कोर्स में जो कुछ छात्रों को पढ़ाया जा रहा वह अपडेट नहीं है। यह आईसीडब्लूए, सीए व कंपनी सेक्रेट्री जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लायक नहीं है।
वह कहते हैं कि कंप्यूटराइज्ड अकाउंटिंग, फंक्शनल मैनेजमेंट आदि नहीं शामिल है जो आगे कंपटीशन के लिए बहुत जरूरी है। आखिर प्रैक्टिकल नॉलेज नहीं देंगे तो सिर्फ कोर्स को पढ़ा देने व रटा देने से क्या होगा।
जबकि एलयू व उससे संबद्ध डिग्री कॉलेजों में सबसे ज्यादा डिमांड बीकॉम के कोर्स की ही है। वहीं केकेवी में स्टूडेंट को अलग से कंप्यूटर ट्रेनिंग देने और टैली की नॉलेज दी जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर एलयू व इससे संबद्ध सभी कॉलेजों में एक समान कोर्स हो तो छात्रों को अपडेट कोर्स पढ़ने का मौका मिलेगा। फिलहाल एलयू में इस बार बीए इकोनॉमिक्स का नया कोर्स पढ़ाया जा रहा है।
वह थोड़ा अपडेट भी है। मगर एलयू में एक समान पाठ्यक्रम का विरोध खुलकर होता आया है। फिलहाल विवि में कुछ विभागों में एक समान पाठ्यक्रम के तहत कोर्स को बदला या अपडेट किया गया है।
बाकी में अभी कोई बदलाव नहीं हुआ। फिलहाल यूपी में सरकार ने स्नातक स्तर पर 150 पाठ्यक्रमों में से 67 कोर्सों को चिह्नित किया था जिसमें से 50 कोर्सों में एक समान पाठ्यक्रम लागू करने की कोशिश की थी लेकिन वह राजधानी की यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में ही लागू नहीं हो पा रहा है।