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इस कॉलेज में पढ़े, तो डिग्री होगी अमान्य
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Thu, 26 Sep 2013 01:16 PM IST
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट (आईआईपीएम) को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अमान्य विश्वविद्यालय घोषित कर दिया है।
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यूजीसी का कहना है कि यह संस्थान फर्जीवाड़ा कर गलत ढंग से डिग्री बांट रहा है और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
संस्था न तो मान्यता प्राप्त है और न ही इसे एमबीए, बीबीए और बीसीए की डिग्रियां देने का कोई अधिकार है।
आईआईपीएम ने राजधानी लखनऊ भी अपना सेंटर खोल रखा था। इस साल मई में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद छात्रों ने संस्थान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, जिसके बाद से सेंटर बंद है।
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यूजीसी ने अपनी वेबसाइट www.ugc.ac.in पर इस संस्थान को पूरी तरह से फर्जी घोषित किया है। उसके अनुसार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 की धारा 22 (एफ) के तहत यह कोई विश्वविद्यालय नहीं है। इसे किसी भी तरह की डिग्री बांटने का कोई अधिकार नहीं है।
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विभिन्न राज्यों में अपने केन्द्र चला रहा आईआईपीएम अपना मुख्य केन्द्र नई दिल्ली बताता है। यूजीसी ने नई दिल्ली केन्द्र को ही अमान्य विश्वविद्यालय की श्रेणी में डाल दिया है।
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वहीं, आईआईपीएम ने लखनऊ के हजरतगंज में भी अपना सेंटर खोल रखा था। यहां इसने छात्रों को झांसा देकर लाखों रुपये की फीस जमा कराई। हालांकि कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स को मार्कशीट नहीं दी गई।
बीते मई में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद यहां छात्रों ने काफी बवाल मचाया था। छात्रों ने मुकदमा दर्ज कराके आरोप लगाए थे कि उन्हें वर्ष 2011 में कर्नाटक के गुलबर्गा विश्वविद्यालय की डिग्री देने का आश्वासन दिया गया था।
कुछ महीने बाद मेघालय के महात्मा गांधी विश्वविद्यालय की डिग्री देने की बात कही गई। बीते महीनों में यहां कई बार हंगामा हो चुका है, लेकिन स्टूडेंट को डिग्री नहीं मिली है।