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कॉलेजों पर सीधे कार्रवाई करेगी टेक्निकल यूनिवर्सिटी

Wed, 11 Dec 2013 02:06 AM IST
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ Updated Wed, 11 Dec 2013 02:06 AM IST
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ugc is drafting new rules and regulation

अब इंजीनियरिंग कॉलेजों पर टेक्निकल यूनिवर्सिटी सीधे कार्रवाई कर सकेगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने टेक्निकल एजूकेशन के लिए रेग्युलेशन-2013 तैयार किया है।

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इसके तहत अब इंजीनियरिंग कॉलेजों की डोर सीधे टेक्निकल यूनिवर्सिटी के हाथ होगी। वह कॉलेजों को विभिन्न कोर्सों की मान्यता देगी और मानक पूरे न होने पर वह उन पर सीधे कार्रवाई कर सकेगी।
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यूजीसी के जॉइंट सेक्रट्री डॉ. केपी सिंह के अनुसार रेग्युलेशन-2013 के तहत अब कॉलेजों पर यूनिवर्सिटी सीधे शिकंजा कस सकेगी।

अभी तक ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) के सेक्शन 2 एच में टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस की व्याख्या की गई है और इसके कारण यूनिवर्सिटी सीधे कॉलेजों पर शिकंजा नहीं कस पाती।
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अब टेक्निकल एजूकेशन के लिए एप्रूवल ऑफ कॉलेजेस ऑफरिंग टेक्निकल एजुकेशन बाई यूनिवर्सिटी रेग्युलेशन 2013 तैयार हो रहा है। इसके बाद यूनिवर्सिटी की शक्तियां काफी बढ़ जाएंगी।

यूनिवर्सिटी से लेना होगा एप्रूवल
अब इंजीनियरिंग कॉलेजों को एप्रूवल के लिए सीधे टेक्निकल यूनिवर्सिटी से फॉर्म प्राप्त करना होगा।

कोई नया कॉलेज खोलने के लिए, पहले से चल रहे कॉलेजों की साइट लोकेशन बदलवाने के लिए, वीमेंस कॉलेज से को-एड कॉलेज में बदलने, कॉलेज का नाम बदलने, कोई प्रोग्राम बंद करने, कोर्स व सीटें बढ़ाने, इंटीग्रेटेड, सेकेंड शिफ्ट प्रोग्राम, पार्ट टाइम प्रोग्राम, डुअल डिग्री कोर्स खोलने के लिए उसे यूनिवर्सिटी ही एप्रूवल देगी।

फीस रिफंड न करने पर दोगुना जुर्माना
अगर यूनिवर्सिटी की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार कॉलेज स्टूडेंट्स को फीस रिफंड नहीं करता है तो उस पर सीधे कार्रवाई होगी।

मान लीजिए कोई स्टूडेंट कॉलेज से अपना दाखिला वापस लेना चाहता है और इंजीनियरिंग कॉलेज उसे फीस देने में आनाकानी करते हैं तो उस पर यूनिवर्सिटी कुल फीस का दोगुना जुर्माना लगा सकती है।

बिना एप्रूवल दाखिला लेना पड़ेगा महंगा
अगर यूनिवर्सिटी संबद्धता की औपचारिकता को पूरा किए बगैर ही किसी कोर्स में स्टूडेंट का दाखिला लेता है तो यह उसे महंगा पड़ेगा।

उस पर यूनिवर्सिटी एक साल के लिए दाखिले पर प्रतिबंध लगा सकेगी, उसके कोर्स की मान्यता खत्म कर सकती है या फिर संपूर्ण कॉलेज की मान्यता रद कर सकती है।

अभी कॉलेजों को अपनी मान्यता का रिन्यूवल करवाना होता है लेकिन वह हर साल इसमें टाल मटोल करते हैं, मगर अब वह ऐसा नहीं कर पाएंगे।

मूलभूत संसाधन व योग्य शिक्षक न रखने पर होगी कार्रवाई
अगर यूनिवर्सिटी की ओर से बनाए नियमों के अनुसार उसने टीचर को भर्ती नहीं की और उन्हें पर्याप्त वेतन नहीं दिया तो उन पर सीधी कार्रवाई होगी।

उनके एक वर्ष के दाखिले पर रोक, कोर्स की मान्यता वापसी और उनके कॉलेज की मान्यता वापसी हो सकती है। यही सजा कॉलेज को अपने यहां लाइब्रेरी, कम्प्यूटर और अन्य सुविधाएं पूरी न होने पर यूनिवर्सिटी जांच करके दे सकेगी। इस प्रकरण का अधिकतम 18 महीने के भीतर निपटारा करना होगा।

क्षमता से अधिक सीटों पर दाखिला तो पांच गुना जुर्माना
अब यूनिवर्सिटी से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेज अगर बीटेक, बीफॉर्मा, बीआर्क सहित किसी भी कोर्स में क्षमता से अधिक सीटों पर दाखिला लेंगे तो उनसे यूनिवर्सिटी सीधे पांच गुना जुर्माना वसूल सकेगी।

उसने जितने अधिक छात्रों का प्रवेश लिया है उसे प्रति छात्र की फीस का पांच गुना जुर्माना देना होगा। इसके अलावा उसके कोर्स की मान्यता या फिर कॉलेज की मान्यता भी खत्म हो सकती है।


डिप्लोमा पास स्टूडेंट्स के लिए 20 प्रतिशत सीटें निर्धारित
डिप्लोमा व बीएससी डिग्री वाले वह स्टूडेंट जिन्हें बीटेक, बीफॉर्मा और बीआर्क के सेकेंड ईयर में सीधे दाखिला मिलेगा उनके लिए अब कुल सीटों की 20 प्रतिशत सीटें निर्धारित रहेंगी।

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