लखनऊ यूनिवर्सिटी में शुरू किए जाएंगे ये दो नए कोर्सेज
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लखनऊ विश्वविद्यालय में जल्द ही न्यूक्लियर एनर्जी और बायोमास से संबंधित कोर्स भी पढ़ने को मिलेंगे। इसके लिए एलयू, जर्मनी के कर्ल्सरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से करार करने जा रहा है। यह कोर्स एलयू के डिपार्टमेंट ऑफ रिन्यूएबल एनर्जी के साथ मिलकर चलाए जाएंगे। एलयू में बीवोक कोर्स के तहत बायो एनर्जी का कोर्स चलता है।
इसके अलावा इसी महीने एलयू ने जमर्नी के ही मार्टिन लूथर विवि से जो करार किया था उस पर भी आगे काम करने की तैयारी शुरू की जा रही है जिससे एलयू में जर्मन लैंग्वेज, फार्मास्यूटिकल्स, लॉ व फार्मा बायोटेक के कोर्स को बढ़ावा मिलेगा।
निशक्तजनों के लिए काम करने वाली यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल लंकाशायर को एमओयू भेज दिया गया है। राजधानी का डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय भी विदेशी विश्वविद्यालयों व अन्य शिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू के प्रयास में है।
हाल ही में जर्मनी यात्रा से वापस लौटे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निशीथ राय ने बताया कि इसके लिए कुछ संस्थानों से बात करने की तैयारी है। ऐसे संस्थानों को भी चिह्नित किया जाएगा जो निशक्तजनों से जुड़े कोर्स का संचालन करते हों या इसी से संबंधित क्षेत्र में कार्य कर रहे हों।
बायोमास से बढ़ेगा ऊर्जा का उत्पादन:कुलपति
एलयू के कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने बताया कि कार्ल्सरुहे इंस्टीट्यूट, बायोमास और न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में बेहतर काम कर रहा है। बायोमास में तो इसका विश्वभर में नाम है।
हाल ही में इस संस्थान ने बायोमास से संबंधित नई तकनीक भी खोजी है जिससे कि ऊर्जा के इस स्रोत की लागत बहुत कम है। प्रो. निमसे ने बताया कि जिस तरह ऊर्जा की मांग बढ़ रही है ऐसे में उसके वैकल्पिक स्रोत का उपयोग बढ़ाना जरूरी है।
इसकी हमारे यहां कोई कमी नहीं है और यदि शोध को बढ़ावा दिया जाए तो इनकी लागत भी कम हो सकती है। अभी हमारे यहां सौर ऊर्जा का तो इस्तेमाल बढ़ा है लेकिन बायोमास का उपयोग कम है।
इसी तरह न्यूक्लियर एनर्जी भी ऐसा क्षेत्र है जिसमें काफी अच्छा स्कोप और बेहतर कॅरिअर है। प्रो. निमसे ने बताया कि एमओयू के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है और संस्थान से बात भी शुरू हो चुकी। उम्मीद है कि जल्द ही वहां के कुलपति एलयू आएंगे।
विदेश जाने से पहले होगी स्टूडेंट्स की रैंकिंग
निमसे ने इसी महीने अपनी जर्मनी यात्रा के दौरान वहां के मार्टिन लूथर विवि हैले-विटेनबर्ग के साथ एमओयू साइन किया है। उन्होंने बताया कि हमारे यहां से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं जर्मनी से फार्मास्यूटिकल बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने जाते हैं।
यहां की मेरिट जुड़ने पर उनको वहां प्रवेश तो मिल जाता है लेकिन बेहतर प्रदर्शन न करने पर उनमें बहुत कम सफल होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए एमओयू में एक बिंदु ये भी शामिल किया गया है कि अब जो भी छात्र इस विषय की पढ़ाई के लिए वहां जाएंगे मार्टिन लूथर विवि उनका एक कॉमन टेस्ट कराकर रैंकिंग देगा।
इसी के आधार पर उनको वहां प्रवेश मिलेगा। इस व्यवस्था से छात्र के पुरानी पढ़ाई के अंक मायने नहीं रखेंगे।
ग्लोबल एक्सपोजर देने को बढ़ रहा रुझान
समय की मांग को देखते हुए राजधानी के शिक्षण संस्थानों का रुझान छात्र-छात्राओं को ग्लोबल एक्सपोजर की तरफ बढ़ रहा है। एलयू पिछले छह माह में दो विदेशी संस्थानों से एमओयू कर चुका है जबकि दो से करने जा रहा है।
इसी तरह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ ने भी वर्तमान सत्र से ही अपने यहां से विदेश जाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। अभी तक यहां निदेशक रहे प्रो. भरत भास्कर ने बताया कि आईआईएम के प्रत्येक बैच में 15 फीसदी छात्र ही एक टर्म की पढ़ाई विदेश में करते हैं। लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।
नए कॉन्सेप्ट पर पढ़ाई
एलयू , जर्मनी के एक और संस्थान से एमओयू के प्रयास में है। इसके लिए बातचीत शुरू हो चुकी है। प्रो. निमसे ने बताया कि जर्मनी के उस संस्थान में पढ़ाई का कॉन्सेप्ट बिल्कुल अलग है। वहां स्नातक स्तर का पाठ्यक्रम इस तरह डिजाइन किया गया है कि छात्र पढ़ाई के साथ कमाई भी करते हैं।
वहां का सिलेबस ऐसा है कि छात्र तीन साल में छह सेमेस्टर पढ़ता है। इनमें से एक सेमेस्टर कॉलेज में पढ़ाई होती है तो दूसरे में इंडस्ट्री की पेड ट्रेनिंग। इसी तरह तीसरे व पांचवें में पढ़ाई और चौथे व छठे में ट्रेनिंग। हालांकि इसके लिए एलयू को अपने यहां ऑटोनॉमस कॉलेज खोलने की आवश्यकता होगी।