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हिमाचल प्रदेश विवि रिसर्च सेंटर को दो करोड़ मंजूर

Sun, 20 Sep 2015 11:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 20 Sep 2015 11:54 AM IST
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two crore grant for hpu shimla.

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के जनसंख्या शोध केंद्र को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के तहत दो करोड़ का सर्वे प्रोजेक्ट मंजूर किया है। यह पहला मौका है जब केंद्र ऐसा सर्वे करेगा।

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सर्वे प्रदेश के बारह जिलों के 9,120 परिवारों के सैंपलों के आधार पर होगा। इसमें जनसंख्या शोध केंद्र को यह सर्वे प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्तर की तकनीक और वित्तीय प्रतिस्पर्धा के बाद मिला है। सर्वे के लिए दो करोड़ आठ लाख की राशि मंजूर हुई है। अक्तूबर से शोध केंद्र सर्वे शुरू कर देगा। इसमें शोध केंद्र ओरआरजी मैक्रो यूएसए अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या अध्ययन संस्थान मुंबई से तकनीकी परामर्श लेकर पूरा किया जाएगा।
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इसके अलावा यूएसएआईडी, डीएफआईडी, यूएनआईसीईएफ, यूएनएफपी ए और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से वित्तीय सहायता मिलेगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने शोध केंद्र को केंद्र सरकार से दो करोड़ से अधिक का सर्वे प्रोजेक्ट मंजूर होने पर खुशी जताई है।
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उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है कि जब केंद्र को इस तरह की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो. नरेंद्र सिंह विष्ट, वर्तमान अध्यक्ष प्रो. संजू करोल और केंद्र के कर्मचारियों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। कहा कि वे इस प्रोजेक्ट को पूरा कर अपने को साबित करें। सर्वे में जो आंकड़े और तथ्य सामने आएंगे वह प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार करने के लिए योजनाएं बनाने में उपयोगी साबित होंगे।

पूर्व निदेशक प्रो. नरेंद्र विष्ट और वर्तमान अध्यक्ष संजू करोल ने बताया कि 1990 में शुरू हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण भारत में शुरू किया था। इसमें देश के राज्यों की जनसंख्या, उनके स्वास्थ्य, पोषाहार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के बारे में जानकारी एकत्र की जाती है।


1992-93 में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण भी करवाया था। अब चौथा सर्वे करवाया जा रहा है। बताया कि एनएफएचएस के तहत कई नए विषयों पारिवारिक जीवन, शिक्षा, किशोरावस्था स्वास्थ्य, उच्च जोखिम, यौन व्यवहार, तपेदिक तथा मलेरिया के आंकड़े और जानकारी एकत्र की जाएगीष पूर्व में हुए सर्वे में सिर्फ 15 से 49 वर्ष की विवाहिता महिलाओं को ही शामिल किया जाता था अब 15 से 49 साल की महिलाओं और 15 से 54 साल तक के पुरुषों को भी लिया जाएगा। पहली बार एचआईवी से संबंधित आंकड़े भी सर्वे में जुटाए हैं।

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