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टॉपर्स देंगे लखनऊ विश्वविद्यालय को टॉप बनाने का नुस्खा
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 09 Feb 2014 12:04 PM IST
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एलयू को टॉप यूनिवर्सिटी बनाने में अब टॉपर्स का सक्रिय योगदान होगा। सभी महत्वपूर्ण कमेटियों में टॉपर्स की सक्रियता बढ़ेगी।
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राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) की मॉनिटरिंग कमेटी में टॉपर्स को शामिल किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सभी फैकल्टी के टॉपर्स को एक प्लेटफॉर्म पर एकत्र कर उनसे स्टूडेंट्स से जुड़े हर मुद्दे पर रेग्युलर फीडबैक लिया जाएगा।
यही नहीं, यूनिवर्सिटी सभी टॉपर्स को अलग से विशेष परिचय पत्र देगी, ताकि उनकी विशिष्ट पहचान हो। एलयू अपने टॉपर्स को राजधानी के आर्ट्स व कल्चर से रूबरू करवाने के लिए हेरिटेज वॉक पर ले जाएगी।
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शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग में टॉपर्स एकेडमी की पहली बैठक में करीब 86 टॉपर शामिल हुए।
लखनऊ विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर और टॉपर्स एकेडमी के प्रमुख प्रो. मनोज दीक्षित ने सभी टॉपर्स से कहा कि खुद को अलग-अलग विभागों का न समझकर एक साथ विवि के हित में काम करें।
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वे बताएं कि यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के लिए क्या बेहतर किया जा सकता है? एलयू में टीचिंग से लेकर मिलने वाली सुविधाओं का रिव्यू करें। इसके बाद फीडबैक दें। प्रो. दीक्षित ने कहा कि अभी कितने टॉपर्स ऐसे होंगे।
जो एलयू का इतिहास नहीं जानते होंगे, जबकि अपने विश्वविद्यालय व शहर का इतिहास जानना बहुत जरूरी है। ऐसे में सभी टॉपर्स को फरवरी में हेरीटेज वॉक पर ले जाया जाएगा।
सभी टॉपर्स को ई-मेल पर एलयू के इतिहास का ऑनलाइन लिंक उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके अलावा टॉपर्स के लिए विशेष वर्कशॉप व सेमिनार भी होंगे।
टॉपर्स ने भी पूरे जोश के साथ उन्हें भरोसा दिलाया कि वे यूनिवर्सिटी को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। एलयू में अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. निशी पांडेय ने टॉपर्स से कहा कि वे लिबरल आर्ट्स सीखें।
उन्होंने अंग्रेजी विभाग में शुरू होने वाले आठ नए एडऑन कोर्सेज में दाखिला लेने के लिए टॉपर्स को ऑफर दिया। कार्यक्रम में डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. अनिल शुक्ला ने कहा कि हावर्ड व कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी अपने स्टूडेंट्स की वजह से अच्छी मानी जाती हैं।
टीचर पर जब कार्रवाई नहीं होगी तो कैसा फीडबैक
मेधावियों ने बेबाक ढंग से अपनी बातें रखीं। कहा कि अगर क्लास रूम टीचिंग को लेकर फीडबैक पर जब कोई शिक्षक हटाया ही नहीं जाएगा, तो उसका क्या फायदा होगा।
इस पर अधिकारियों ने कहा कि टीचर का पेशा ऐसा नहीं है कि उसे दंड दिया जाए, बल्कि अगर उनका रिस्पांस खराब है तो यह उनके लिए आत्म मंथन का विषय होता है।
प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि लोक प्रशासन विभाग में वे वर्षों से फीडबैक लेते आए हैं और जिस टीचर का अच्छा रिस्पांस नहीं है, उनकी क्लास बदल गई। कुछ ने अपनी गलतियों पर सुधार किया और आगे बहुत अच्छा रिस्पांस भी दिया।
आखिर सेल्फ फाइनेंस व रेग्युलर कोर्सेज में क्यों बंटा एलयू
एलयू में दाखिले के लिए मेरिट काफी ऊंची जाती है। ऐसे में बीकॉम जैसे पॉपुलर कोर्सेज सहित कई कोर्सों में 75 प्रतिशत से ऊपर अंक वाले ही दाखिला ले पाते हैं।
अच्छे अंक पाने वाले स्टूडेंट्स को भी सेल्फ फाइनेंस में पढ़ना पड़ता है। रेग्युलर कोर्सेज की अलग पढ़ाई और सेल्फ फाइनेंस की दूसरी पढ़ाई क्यों होती है?
इस पर प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि सरकार की ओर से यह व्यवस्था है। इन कोर्सेज को चलाने का खर्चा खुद उठाना पड़ता है। ऐसे में हमें मजबूरन यह व्यवस्था करनी पड़ती है।
सभी कोर्सेज में स्टूडेंट्स को क्यों नहीं मिलते मेडल
एलयू में कई कोर्स ऐसे हैं, जिसमें स्टूडेंट्स को मेडल नहीं दिए जाते। खासकर सेल्फ फाइनेंस कोर्सों में तो बहुत कम ऐसे हैं। इस पर प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि यहां पर ज्यादातर मेडल इस्पांसरशिप के तहत चल रहे हैं।
पहले नियम था कि कोई भी 15 हजार से 25 हजार जमा करके अपना मेडल शुरू करवा सकता था। अब यह राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है। ऐसे में इस्पांसर बहुत कम आते हैं।
कुछ रेग्युलर कोर्स भी ऐसे हैं, जहां मेधावियों को मेडल नहीं मिलते। आगे स्थिति अच्छी होगी, उम्मीद है कि बड़ी संख्या में लोग मेडल को इस्पांसर करने आएंगे।