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गढ़वाल विवि की परेशानियों का ढूंढा जाने लगा 'हल'

Sun, 29 Sep 2013 08:57 PM IST
अमर उजाला, श्रीनगर
अमर उजाला, श्रीनगर Updated Sun, 29 Sep 2013 08:57 PM IST
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to be found solution of the garhwal university problems

केंद्र सरकार ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी एक्ट में संशोधन करने की कवायद शुरू कर दी है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने मुख्य सचिव उत्तराखंड और हेमवती नंदन बहुगुण केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र भेजकर इस पर सुझाव मांगे हैं।

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इसमें केंद्रीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों और संस्थानों के डिसएफिलिएशन का मुद्दा प्रमुख है। केंद्रीय विश्वविद्यालय एक्ट-2009 के तहत एचएनबी समेत छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों को केंद्रीय दर्जा मिला था।
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नियमों में बदलाव की जरूरत
अब इन विश्वविद्यालयों के नियमों में बदलाव की जरूरत महसूस होने लगी है। इस समय गढ़वाल विवि से करीब 180 राजकीय, सहायता प्राप्त व निजी कॉलेज संबद्ध हैं।

मगर केंद्रीय विश्वविद्यालय एक्ट-2009 में डिसएफिलिएशन के लिए कोई प्रावधान न होने के कारण इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। इस कारण राज्य सरकार और विवि दोनों को ही मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
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संशोधन के लिए सुझाव मांगे
एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) के विशेष सचिव आरपी तिवारी ने एक्ट के संशोधन के संबंध में एचएनबी समेत तीनों विश्वविद्यालयों और संबंधित राज्यों के प्रमुख सचिवों को 16 सितंबर को पत्र भेजा है।


इसमें केंद्रीय विश्वविद्यालय एक्ट-2009 में संशोधन के लिए सुझाव मांगे गए हैं। इसमें डिसएफिलिएशन और संपत्ति, जिम्मेदारी और कर्मचारियों के हस्तांतरण का मुद्दा प्रमुख है।

इसलिए जरूरी है डिसएफिलिएशन
- केंद्रीय विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के प्रवेश संबंधी नियमों में अलग-अलग मानक हैं। इस कारण काफी दिक्कत पेश आती हैं।
- सेमेस्टर सिस्टम लागू करने में परेशानी। अभी तक केवल पीजी कक्षाओं में ही शुरू किया जा सका है।
- 2009 में डिस एफिलिएशन का प्रावधान नहीं था। विवि खुद किसी कॉलेज की संबद्धता समाप्त नहीं कर सकता जब तक कि संस्थान मांग न करे।

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