अब खेल के दाखिलों में नहीं हो सकेगा ‘खेल’
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दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर होने जा रहे खेल कोटे के तहत दाखिलों में खेल नहीं हो सकेगा। दरअसल, प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2015-16 में स्पोर्ट्स कोटे के दाखिलों के लिए सख्त व प्रभावी कदम उठाए हैं।
फिटनेस टेस्ट व ट्रायल में अलग-अलग छात्रों के बैठने की धांधली नहीं होगी बल्कि फर्जीवाड़ा रोकने के लिए आवेदक की फोटो भी वेबसाइट पर अपलोड होगी। इतना ही नहीं कॉलेजों को खाली सीटों की जानकारी, खेल के संबंध में जानकारी 28 मई से ही वेबसाइट व नोटिस बोर्ड पर देनी होगी।
मालूम हो कि आज से ही स्पोर्ट्स कोटे के आवेदन कॉलेजों में किए जा सकेंगे। जिसके ट्रायल 23 जून से होंगे। डीयू स्पोर्ट्स काउंसिल के सचिव डॉ. अनिल कलकल ने बताया कि खेल के दाखिलों में कॉलेज इस बार मनमर्जी नहीं कर सकेंगे।
कॉलेज ग्रीवांस कमेटी का अहम रोल
इसके लिए उन्हें 28 मई से शुरू होने वाली आवेदन प्रक्रिया से पहले कॉलेज की वेबसाइट पर कॉलेज में कौन-कौन सा खेल उपलब्ध हैं। किस खेल के लिए किस खिलाड़ी की जरूरत है।
मसलन यदि कॉलेज क्रिकेट के लिए तीन दाखिले कर रहा है और उसमें एक विकेटकीपर चाहिए, तो इसकी जानकारी भी अपलोड करनी होगी। इस तरह से छात्र आवेदन करने से पहले ही खेल के दाखिलों व सीटों की जानकारी को देखकर आवेदन कर सकेंगे।
इसके साथ ही कॉलेजों को बाध्य किया गया है कि वह ट्रायल में चयन हुए छात्रों के अंकों को कॉलेज की वेबसाइट पर तीन दिन तक प्रदर्शित करें। जिससे कि यदि किसी छात्र को किसी अन्य छात्र के स्कोर को लेकर किसी तरह की आशंका है तो वह इसकी शिकायत कॉलेज ग्रीवांस कमेटी में कर सकता है।
यदि छात्र का संशय ग्रीवांस कमेटी में भी दूर नहीं होता तो वह विश्वविद्यालय स्तर पर इसकी जांच करने के लिए कह सकता है।
स्पोर्ट्स कोटे के तहत सीधे दाखिला
स्पोर्ट्स कोटे के तहत इस बार सीधे दाखिले का प्रावधान भी किया गया है। इसके लिए एक सुपर कैटेगरी बनाई गई है। इस कैटेगरी के तहत छात्र को फिटनेस टेस्ट व ट्रायल नहीं देना होगा।
उनका दाखिला सीधे होगा लेकिन उसकी शर्त यह होगी कि वह ओलंपिक वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स, राष्ट्रमंडल खेल व पैरा ओलंपिक प्रतियोगिताओं में भारत में भारत की ओर से बेहतरीन प्रदर्शन कर चुका हो।
खेल कोटे के तहत दाखिला लेने वालों को फिटनेस टेस्ट प्रमाणपत्र के लिए इंतजार नहीं करना होगा। उसके फिटनेस टेस्ट की रिपोर्ट फोटो के साथ वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी जाएगी।
वह सीधे वेबसाइट से टेस्ट की सॉफ्ट कॉपी ले सकेंगे। इसके साथ ही अब छात्रों को स्वयं सत्यापित ही सर्टिफिकेट देने होंगे। सत्यापन कराने के लिए उन्हें इधर-उधर चक्कर नहीं काटने होंगे।